घेंघा या गॉइटर रोग की जाँच और पहचान

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7th February, 2016

Ghengha rog ki pahchan kaise ki jati hai? | घेंघा रोग की पहचान कैसे की जाती है? | How to Diagnose for Goitre?घेंघा आमतौर आवश्यक खनिज तत्व (Mineral) आयोडीन की कमी से होने वाला रोग है। इसमें रोगी का सामने की ओर से, कंठ के नीचे गला फूल जाता है। हालाँकि कि सामान्य अवस्था में घेंघा से कोई विशेष परेशानी नहीं होती है सिवाय दिखने में ख़राब लगता है, परन्तु गम्भीर स्थिति में गले और थायराइड का कैंसर जैसी घातक बीमारी का कारण भी बन सकता है। इसीलिए घेंघा को हल्के में नहीं लेना चाहिए। प्रारम्भिक स्थिति में (जब तक गले में सूजन नहीं आती) इसकी पहिचान एवं निदान करने के लिए कुछ जाँचे होती है।

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जाँच और पहचान

यदि व्यक्ति में घेंघे के लक्षण नज़र आ रहें हों, लेकिन स्पष्ट नहीं हो पा रहा हो कि प्रकट होने वाले लक्षण घेंघा रोग है या नहीं, तो इसकी पुष्टि कुछ जाँचों और चेकअप द्वारा की जा सकती है-

  • सामान्य चेकअप के द्वारा – घेंघा इतना बड़ा भी हो सकता है कि उसे  देखकर या हाथ से टटोल कर पता किया जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति को किसी कार्य के दौरान, विशेषकर स्नान करते समय उसके गले में कंठ से नीचे के स्थान पर, आगे की ओर कुछ असामान्य वृद्धि महसूस हो, तो यह घेंघे की वजह से हो सकता है। इस स्थिति में पारिवारिक डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए। वह रोगी के अन्य लक्षणों या जाँच आदि के आधार पर इसकी पुष्टि कर सकता है।
  • थायराइड वृद्धि के लक्षणों के द्वारा- सबसे पहले डॉक्टर के द्वारा घेंघा होने या न होने की पुष्टि  करने  के लिए थायराइड वृद्धि के अन्य लक्षणों का पता किया जाता है। जैसे – भूख में वृद्धि के बावजूद वजन घटना, हृदय गति में वृद्धि, रक्तचाप ज्यादा होना, घबराहट, दस्त, मांसपेशियों में कमजोरी और हाथों में झटके लगना, सुस्ती, शारीरिक और मानसिक कार्यों में धीमापन, अवसाद, हृदय गति कम होना, ठंड सहन न कर पाना, कब्ज, बहुत जल्दी वजन बढ़ना और हाथों में झुनझुनी या अकड़न होना आदि। यदि व्यक्ति में इस प्रकार के लक्षण पाए जाते हैं तो इस स्थिति में थायराइड वृद्धि की जाँच करानी जरुरी हो जाती है।
  • अल्ट्रासाउंड द्वारा- इसके लिए थायराइड ग्रंथि का अल्ट्रासाउंड कराया जा सकता है इसके द्वारा थायराइड ग्रंथि के आकार और उसमें होने वाली गाँठों का पता चल जाता है।
  • रेडियो आयोडाइड अपटेक टेस्ट द्वारा – इस टेस्ट के द्वारा यह पता किया जाता है कि किसी निश्चित अवधि के अंदर थायराइड ग्लैंड कितनी मात्रा में आयोडीन का उपयोग करता है।  यदि थायराइड के द्वारा सामान्य से अधिक मात्रा में आयोडीन का उपयोग किया जा रहा है तो यह व्यक्ति को हाइपर्थाइरॉइडिज़म होने का संकेत है और यदि सामान्य से कम मात्रा में आयोडीन का उपयोग किया जा रहा है तो यह हाइपोथायरायडिज्म का संकेत होता है।

टेस्ट के द्वारा थायराइड के की वृद्धि के साथ-साथ यह भी पता किया जा सकता की थायराइड में गांठे हैं या नहीं है और यदि हैं तो अत्यधिक सक्रिय तो नहीं हैं। थायराइड ग्रंथि की अत्यधिक सक्रिय गाँठे कैंसर में परिवर्तित हो सकती हैं।



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