देखिये कैसे आँखों की रौशनी को कमज़ोर बना देता है मोतियाबिंद

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30th January, 2018

मोतियाबिंद दिन-प्रति-दिन एक आम समस्या बनती जा रही है। मोतियाबिंद आम तौर पर 50 से 55 वर्ष के बाद के लोगों को प्रभावित करता है, लेकिन ऐसे बहुत से कारण हो सकते हैं, जिनके चलते मोतिया कम उम्र के लोगों को भी हो सकता है।  

मोतियाबाँध एक ऐसी समस्या है, जो आँखों के लेंस को प्रभावित करती है। इसमें आँखों के लेंस के उत्तकों में किसी प्रकार का कोई दोष उत्पन्न हो जाता है और इसी दोष के चलते ये उत्तक कमज़ोर हो जाते हैं। इसके कारण आँखों के लेंस पर एक धुंधला सा, धुंए जैसा सफ़ेद रंग का धब्बा बन जाता है।

मोतिया, आँख की पुतली के रंगीन भाग के एक दम पीछे पनपता है। यह लेंस ही होता है, जो उस प्रकाश पर ध्यान केंद्रित करता है, जो आँखों के भीतर पहुँच कर रेटिना पर एक साफ़ तस्वीर प्रदर्शित करता है। यह बिलकुल कैमरे के लेंस की तरह काम करता है।

जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, लेंस का लचीलापन कम होता चला जाता है। यह पहले के मुकाबले मोटा होता चला जाता है और इसकी पारदर्शिता कम होती चली जाती है। वहीं बढ़ती उम्र, लेंस के उत्तकों को कमज़ोर बनाती चली जाती है और इससे लेंस के ऊपर धुंए जैसी संरचना बन जाती है।

समय के साथ-साथ यह धब्बा और गहरा होता चला जाता है और जैसे-जैसे यह धब्बा गहराता है, यह आँखों की देखने की क्षमता को प्रभावित करता चला जाता है। यह धब्बा लेंस के द्वारा आँखों में प्रवेश करने वाले प्रकाश को रोकता है। जब आँखों में पर्याप्त मात्रा में प्रकाश नहीं जाता तो रेटिना पर जो तस्वीर बनती है, वह भी धुंधली ही बनती है।

आम तौर पर मोतिया दोनों आँखों में एक साथ पनपता है, लेकिन यह दोनों ही आँखों को एक समान प्रभावित नहीं करता। यह एक में कम तो दूसरे में ज़्यादा हो सकता है। इससे दोनों आँखों की देखने की क्षमता में काफी अंतर भी हो सकता है।



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