रंग दृष्टिहीनता (कलर ब्लाइंडनैस) की समस्या

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23rd March, 2018

Rang Drishtiheenta | रंग दृष्टिहीनता | Color Blindness

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रंग दृष्टिहीनता, एक ऐसी समस्या है, जिसमें व्यक्ति रंगों में भेद नहीं कर पाता। उसे चीजें रंगहीन दिखाई देती हैं। ऐसे व्यक्ति को रंग साफ़-साफ़ दिखाई नहीं देते। इस समस्या को रंग दृष्टि की कमी के नाम से भी जाना जाता है। अंग्रेजी में इसे कलर ब्लाइंडनैस कहा जाता है।

कलर ब्लाइंड व्यक्ति के सामने यदि अलग-अलग रंगों के कपड़े रख दिए जाएं, तो वह उन्हें पहचान कर बता नहीं सकता कि कौन सा रंग हरा है और कौन सा पीला। यह समस्या किसी व्यक्ति में कम हो सकती है और किसी में पूरी तरह से उसके रंगों के पहचानने की क्षमता को छीन चुकी होती है।

हालाँकि, ज़्यादातर कलर ब्लाइंड लोग इस समस्या के साथ बिना ज़्यादा परेशानी के जीना सीख जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में उन्हें परेशानी भी झेलनी पड़ती है। खास तौर पर यदि बात पढ़ाई की हो, या कहीं रंगों में भेद की ज़्यादा जरूरत हो, जैसे सिग्नल पर। वहीं कुछ लोगों को, जो इस समस्या से पूरी तरह से ग्रसित होते हैं, उन्हें अधिक प्रकाश भी सहन नहीं होता और वह थोड़ी भी तेज़ रौशनी होने पर असहज हो जाते हैं।

इस रंग के पीछे जो कारण होता है, वह आनुवंशिक माना जाता है। डॉक्टर का मानना है कि यह समस्या एक परिवार में पीढ़ी दर पीढ़ी चल सकती है। वहीं इससे जुड़ा एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि इस समस्या से महिलाओं के मुकाबले पुरुष अधिक प्रभावित होते हैं। इसका कारण यह है कि यह समस्या X क्रोमोसोम पर मौजूद रहती है।

वहीं इसके अलावा, जन्म के बाद आँख में किसी प्रकार की चोट लगने से भी यह समस्या उत्पन्न हो सकती है। या फिर मस्तिष्क में किसी प्रकार की कोई समस्या या तंत्रिका तंत्र में किसी प्रकार की समस्या होने से भी कलर ब्लाइंडनैस जैसी समस्या पनप सकती है। ऐसा तब होता है, यदि चोट या मस्तिष्क में किसी प्रकार की कमी आँख की उन ज्ञानेंद्रीयों को प्रभावित करती हैं, जो व्यक्ति में रंगों के देखने की क्षमता के लिए आवश्यक होती हैं।

इसके लक्षणों को बताने की ज़रूरत नहीं है। हाँ, छोटे बच्चों में इसे पहचानना बेहद मुश्किल हो जाता है। जब तक बच्चा बड़ा नहीं हो जाता, इस समस्या का पता लगा पाना आसान नहीं होता। यह एक ऐसी समस्या होती है, जिसका कोई उपचार नहीं होता।

हालाँकि, किसी व्यक्ति में रंगों की सही पहचान न कर पाना या फिर रंग देख ही न पाना और चीजें सिर्फ सलेटी या काले और सफेद रंग में नज़र आना दोनों अलग-अलग चीजें हैं। यदि किसी को महज काले और सफ़ेद रंग ही नज़र आते हों, इस स्थिति को ट्रू कलर ब्लाइंडनैस कहा जाता है और यह कलर ब्लाइंडनैस के मुकाबले कम देखने को मिलती है।

यह आवश्यक नहीं होता कि व्यक्ति सभी रंगों में पूरी तरह पहचान नहीं कर पाता। कई बार व्यक्ति कुछ रंगों की पहचान कर लेता है और कुछ की नहीं कर पाता और कई बार वह किसी भी रंग की पहचान नहीं कर पाता।

यदि इस समस्या के उपचार की बात की जाए तो इसका कोई उपचार नहीं होता। हालाँकि कुछ खास किस्म के लेंस के द्वारा कुछ रंगों जैसे लाल-हरा देखने की क्षमता को थोड़ा-बहुत बढ़ाया जा सकता है।

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