उम्र के साथ बढ़ने वाली आँखों की समस्याएं

भाषा चयन करे

17th November, 2015

Umra ke saath badhne vali aankhon ki Samasyayein aur unki Sthiti | उम्र के साथ बढ़ने वाली आँखों की समस्याएं और उनकी स्थिति | Most Common Age Related Eye Diseases and Conditionsजैसे-जैसे हमरी उम्र बढ़ती है, वैसे-वैसे हमारे पूरे शरीर के साथ-साथ, हमारी आँखों पर भी असर पड़ता है। उम्र बढ़ने के साथ, हमारी नज़र भी कमजोर होने लगाती है। बहुत से लोग तो 50 की उम्र पार करते ही, आँखों की रक्षा हेतु चश्मा या कांटेक्ट लेंस पहनना शुरू कर देते हैं।

Image Source

बढ़ती उम्र के व्यक्तियों के लिए यह भी जरुरी हो जाता है कि वह अपनी आँखों का ख्याल रखें और कम से कम साल में एक बार आँखों की जाँच जरूर कराएं। वहीं कभी-कभी उम्र के अलावा आँखों पर किसी के कारण भी बुरा असर पड़ सकता है, जैसे- ग्लूकोमा और मोतियाबिंद। ये दोनों ऐसी बीमारियां हैं जो बढ़ती उम्र प्रभाव को और ज्यादा ख़राब कर देती हैं।

वहीं यदि आपको डायबिटीज, हाइपरटेंशन या उच्च रक्तचाप जैसी समस्याएं हों तो, आपके लिए यह बेहद जरुरी होता है कि आप अपना रेगुलर चेकअप कराएं।

कुछ अन्य बीमारियां जो बढ़ती उम्र में बेहद आम होती हैं-

प्रेसबायोपिया (Presbyopia) – इस रोग में मुख्यतः आपको पास की चीजें या बहुत छोटी चीजों को देखने में परेशानी आती है। यह एक सामान्य प्रक्रिया है, जोकि उम्र बढ़ने के साथ बढ़ती है। लेकिन जब तक कि हमारी उम्र 40 की ना हो जाएं हम इस बात पर कोई ध्यान नहीं देते। प्रेसबायोपिया को चश्में के द्वारा ठीक किया जा सकता है।

फ्लोटर्स (Floaters) – इस बीमारी में हमारी आँखों में छोटे- छोटे धब्बे या चिह्न बन जाते है। अकसर लोग इस बीमारी को बहुत रोशनी वाले कमरें या फिर घर से बाहर रोशनी में ही नोटिस करते हैं। यह एक सामान्य सी बीमारी है, लेकिन कभी-कभी यह आँखों के लिए गंभीर समस्या उत्पन्न कर सकती है, जैसे – रेटिना डिटैचमेंट, मुख्य रूप से यदि आपको प्रकाश की चमक भी नज़र आ रही है। यदि आपको अचानक ही आँखों में अलग प्रकार का या ज्यादा स्पॉट या फिर चमक सी नज़र आ रही है, तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

मोतियाबिंद (Cataracts)- मोतियाबिंद में आई लेंस पर धुंधली परत सी बन जाती है। सामान्य स्वस्थ आँखों में आई लेंस, कैमरे के लेंस की तरह बिलकुल साफ़ होती है। प्रकाश आराम से आँखों लेंस से होते हुए, रेटिना तक बिना किसी रुकावट के पहुंच जाता है, और वहीं छवि का निर्माण होता है। वहीं यदि आपको मोतियाबिंद हो चुका है, तो प्रकाश आसानी से, लेंस से होकर रेटिना तक नही पहुंच पाता और आपको देखने में समस्या आ सकती है। मोतियाबिंद बेहद धीरे-धीरे होता है, आँखों में दर्द, पानी आना, और लाल हो जाने जैसी समस्याएं इसमें आम होती हैं। कुछ लोगों में यह बहुत थोड़े समय के लिए होता है और आपको देखने में कोई परेशानी नहीं होती। यदि यह बढ़ जाये और मोटी हो जाये, तो इसके लिए आपको सर्जरी करने की आवश्यकता हो सकती है।

ग्लूकोमा (Glaucoma)- ग्लूकोमा एक ऐसी बीमारी है, जिसमें हमारी आँखों का ऑप्टिक नर्व डैमेज हो जाता है और यह स्थिति समय के साथ और भी खराब होती चली जाती है। ग्लूकोमा, ज्यादातर आँखों पर बढे दबाव के साथ जुड़ा हुआ है। हमारी आँखे, टायर की तरह ही होती हैं, और उन्हीं की तरह एक निश्चित सीमा तक दबाव को झेल सकती हैं। लेकिन जब यही इसमें दबाव् बढा दिया जाये, तो यह ऑप्टिक नर्व को नुक्सान पहुंचाना शुरू कर देती है, जिसे प्राइमरी ओपन एंगल ग्लूकोमा कहा जाता है।

यह एक दुर्लभ बीमारी है, और यह दबाव के अलावा कुछ अन्य कारणों से भी हो सकती है। उदाहरण के तौर पर, आंख में चोट, गंभीर संक्रमण, रक्त वाहिकाओं में रुकावट, या आंखों की सूजन इत्यादि। प्राइमरी ग्लूकोमा के लक्षण अक्सर नज़र नहीं आते, और न ही आपको आँखों में दर्द होता है, इसलिए आपको रेगुलर डॉक्टर से अपने आँखों का चेकअप करते रहना चाहिए। इसके इलाज में आईड्रॉप और सर्जरी का इस्तेमाल होता है।

रेटिनल विकार (Retinal disorders)- रेटिना आँखों के पीछे एक पतली परत होती है, जोकि कोशिकाओं से मिलकर बनी होती है। यह, जो चित्र हमें नज़र आती है उसे इकट्ठा करके, मस्तिष्क तक उसकी तस्वीर को भेजता है। रेटिना में किसी प्रकार की समस्या होने से यह छवि, दिमाग तक नहीं पहुंच पाती। इसमें उम्र बढ़ने से साथ आँखों के मैक्यूला का नष्ट होना (AMD), डायबिटीक रेटिनोपैथी और रेटिनल डिटैचमेंट शामिल है। प्रारंभिक निदान और उपचार, इन समस्यायों से छुटकारा पाने और अपनी नज़र में सुधार के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।



अधिक जानकारी के लिए क्लिक करे !





अधिक जानकारी के लिए क्लिक करे !