आँखों में होने वाली आम समस्याएं

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4th December, 2015

Aakhon mein Hone Wali Aam Samasyayon ki Suchi | आँखों में होने वाली आम समस्याओं की सूची | List of Common Eye Problemsहमारी आँखें, कई छोटे-छोटे हिस्सों से मिलकर बनी होती हैं। ये हिस्से, वह छोटी-छोटी जटिल ग्रन्थियां होती हैं, जिनमें से प्रत्येक हिस्सा सामान्य दृष्टि के लिए अनिवार्य है। आँखों के द्वारा, साफ देख पाने की क्षमता इस बात पर निर्भर करती है कि ये हिस्से परस्पर कितने बेहतर तरीके से काम करते हैं।

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किसी भी छवि को बनाने के लिए हमारी दोनों आँखें, बराबर रूप से कार्य करती हैं। सटीक दृष्टि के लिए दोनों आँखें एक साथ आसानी से सटीक एवं बराबर काम करती हैं। लेकिन हमारी इन आँखों के किसी भी अंग की कार्य क्षमता में कमी आ जाए, तो इसका सीधा असर हमारी आँखों पर पड़ता है।

वैसे तो बढ़ती उम्र के साथ हमारी आँखों में समस्याएं आना बेहद आम है, लेकिन कभी-कभी यह परेशानी कम उम्र से भी आनी शुरू हो जाती हैं। वहीं इनमें से कुछ समस्याएं अस्थिर होती हैं, और बेहद जल्दी ठीक हो जाती हैं।

यहाँ हम आँखों की कुछ ऐसी ही समस्याओं पर चर्चा कर रहे हैं।

सूखी आंखें (Dry eyes syndrome)- ड्राई आईज सिंड्रोम यानी सुखी आँखें, वह समस्या है, जिसमें आँखों की आँसू बनाने वाली ग्रंथि तेजी से और सही मात्रा में, आँसू नहीं बना पाती। केटकंजंक्टिविटिस सिक्काइस नाम से भी जाने-जानी वाली इस बीमारी में, आँखो में, खुजली, जलन लाली और सूजन आ जाती है। कभी-कभी इसके कारण कम दिखना भी शुरू हो जाता है।

इसके इलाज में डॉक्टर आपको घर पर हमीडिफायर (humidifier) का प्रयोग करने की सलाह दे सकते है। या फिर इसके लिए कोई आई ड्राप भी आपको बताई जा सकती है। यह आईड्रॉप आंसुओं आँखों में आंसुओं की ग्रंथि को सक्रीय कर देती है।

इसके अलावा, डॉक्टर लिपिफ्लो के द्वारा भी आँखों को गर्मी और दबाव देकर इलाज कर सकते हैं। वहीं इसका इलाज, टियर डक्ट्स में प्लग डालकर भी किया जाता है, ताकि आंसुओं को बाहर निकलने से रोक जा सके। आज कल डॉक्टर एक विशेष प्रकार की नयी तकनीक का भी प्रयोग करते हैं, जिसे लिपिफ्लो कहा जाता है। इस तकनीक में गर्मी और दबाव की मदद से शुष्क आँखों का इलाज किया जाता है।

आँसू आना (Tearing)- इस बीमारी में आँखें, प्रकाश, हवा और तापमान में परिवर्तन के लिए बहुत संवेदनशील हो जाती है, और आँखों से बहुत ज्यादा पानी आना शुरू हो जाता है। कभी-कभी धूप का चश्मा और अपनी आँखों को ढक कर इस बीामरी से बचा जा सकता है। कभी-कभी आँखों से लगातार पानी आना, किसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है। उदाहरण के तौर पर, आँखों में संक्रमण होना टियर डक्ट्स का ब्लॉक होना। आपका डॉक्टर इन दोनों रोगों का इलाज कर सकता है।

आँख आना (Conjunctivitis)- इसमें पलकों की अंदरूनी सतह और कॉर्निया को ढकने वाले टिश्यू में सूजन आ जाती है। इसे ‘पिंक आई’, ‘कंजंक्टिवाइटिस’ या “ नेत्र शोथ” के नाम से भी जाना जाता है। इसके मुख्य लक्षण, आँखों में लाली, खुजली, जलन, आँसू, कीचड़ और तेज चुभन हैं। यह बीमारी हर उम्र के लोगों को हो सकती है। इसका कारण, संक्रमण, रसायन का संपर्क और उत्तेजक पदार्थ, या एलर्जी होते हैं।

कॉर्नियल डिजीज (Corneal diseases)- कॉर्निया, आँखों के सामने साफ़ और गुंबद के आकार का होता है। यह आँखों पर पड़ने वाले प्रकाश पर फोकस करने में मदद करता है। कोई अन्य बिमारी, संक्रमण, चोट, या किसी टॉक्सिक पदार्थ के संपर्क में आने पर कॉर्निया क्षतिग्रस्त हो जाती है। जिसके कारण आँखें लाल होना, आँखों में पानी, दर्द, देखने की क्षमता कम होना, और हेलो इफ़ेक्ट जैसी समस्या हो सकती है। इसके लिए चश्मा, आईड्रॉप और सर्जरी है।

पलकों की समस्या (Eyelid problems)- हमारी पलकें, हमारी आँखों की सुरक्षा करते हैं। यही आँसू वितरण और आंख में प्रवेश करने वाली प्रकाश की मात्रा को नियंत्रित करते है। दर्द, खुजली, आँसू और प्रकाश के लिए आँखों का संवेदनशील होना इसके आम लक्षण है। इसके अलावा ड्रुपिंग आईलिड, पलक झपकाने पर ऐंठन, आईलैश के पास पलकों की बाहरी किनारों पर सूजन जैसी समस्या भी देखने को मिलती है। पलकों से सम्बंधित समस्यायों का इलाज अच्छे से सफाई, दवाइयों और सर्जरी के द्वारा किया जाता है।

टेम्पोरल आर्टेराईटिस (Temporal arteritis)- इसे जायंट सेल आर्टेराईटिस ( giant cell arteritis) के नाम से भी जाना जाता है। इसमें शरीर में पाये जाने वाली सभी धमनियों में सूजन आ जाती है। इसके मुख्य लक्षण सिरदर्द, मुँह से कुछ भी चबाने में दर्द और कोमलता या टेम्पल एरिया में सूजन हैं। इसमें कुछ ही दिनों में या कुछ हफ़्तों के बाद अचानक ही दिखाई ना देने जैसी समस्या नज़र आने लगाती है। इसके अलावा कंपन, वजन घटाना और कम ग्रेड वाला बुखार जैसे लक्षण भी दिखते हैं। वैज्ञानिकों को टेम्पोरल आर्टेराईटिस होने के कारण का पता नहीं चला है। लेकिन ऐसा माना जाता है कि बिगड़ी हुई प्रतिरक्षा प्रणाली (impaired immune system ) इसके होने का एक कारण हो सकती है। एक आँख में अचानक दृष्टि की हानि होने के कुछ दिनों या कुछ हफ़्तों के बाद दूसरी आँख में भी दृष्टि की हानि होने लगती है। जब भी आपको अचानक दृष्टि की हानि होती है, तो बहुत महत्वपूर्ण है कि आप तुरंत नेत्र विशेषज्ञ या ऑप्थल्मोलॉजिस्ट सर संपर्क करें। दवा के साथ, शीघ्र उपचार करने पर एक या दोनों आंखों में दृष्टि हानि होने से रोकी जा सकती है।



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