ग्लूकोमा या काला मोतिया की जाँच

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21st November, 2015

Glaucoma ki Jaanch kaise ki jati hai? | ग्लूकोमा की जांच कैसे की जाती है? | How Glaucoma is Diagnosed?यदि आपको लगता है, कि आपको आँखों में परेशानी हो रही है, और धीरे-धीरे आप आँखों में कमजोरी महसूस कर रहें हैं, साथ ही रौशनी में धुंधला नजर आ रहा, या थोड़े से भी अँधेरे में आपको लगता है कि आप चीजों पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहे हैं, तो आपको जाँच के लिए डॉक्टर के पास चले जाना चाहिए।

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इस तरह की परेशानी के लिए आपको, ऑप्थैल्मोलॉजिस्ट के पास जाना चाहिए और वही इस बिमारी के बारे में आपको बेहतर तरीके से बता सकता है। इस बिमारी की जाँच सिर्फ एक या दो बार नहीं बल्कि नियमित तौर पर की जाती है और इसीलिए आपको इसके लिए नियमित रूप से डॉक्टर के सम्पर्क में रहना होगा।

इसकी जाँच मुख्यतः तीन भागों में की जाती है-

पहले सामान्य नेत्र परीक्षण किया जाता है- इस जाँच में सामान्य, रूप से आँखों की जाँच की जाती है। आपके द्वारा बताए गए लक्षणों के आधार पर यह जाँच होती है। आपकी आँखों की दृष्टि की जाँच की जाती है कि आप किस स्तर पर चीजों को देख पाते हैं।

इसके बाद आँखों में कुछ देर तक आई ड्राप डालकर रखा जाता है, और फिर एक मशीन की सहायता से, रेटिना और आँखों की तंत्रिका की गहराई से जाँच की जाती है। यदि जाँच में, आँखों की साइड विजन कमजोर निकलती है, तो इसका अर्थ है कि व्यक्ति ग्लूकोमा से पीड़ित है।

इस रोग की जांच में विशेषज्ञ, ऑप्टिक नर्व के मस्तिष्क से जुड़ने वाले स्थान पर होने वाले परिवर्तन की जांच करते हैं।

निम्न जांचों के द्वारा ग्लूकोमा को होने से पहले ही पहचाना जा सकता है-

  • पचीमेटर (Pachymeter)
  • विजुअल फिल्ड टेस्ट (Visual Field Test)
  • ओफ्थाल्मोस्कोपी (Ophthalmoscopy)
  • इमेजिंग टेक्नोलॉजी (Imaging Technology)
  • गोइनोस्कोपी (Gonioscopy)

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