आँखों से जुड़ी समस्याएं- एक अवलोकन

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11th December, 2017

Aankho se judi samsyaen aur unke naam | आँखों से जुड़ी समस्याएं और उनके नाम | Eye diseases and their name हमारी आँखें बेहद जटिल संरचना होती है। यह एक ऐसा अंग है, जो प्रकाश और दबाव के प्रति प्रतिक्रिया देता है। प्रकाश के प्रति प्रतिक्रिया के चलते ही हम देख पाते हैं। यदि किन्हीं कारणों से आँख की संरचना में बदलाव आने लगते हैं, या आ जाते हैं, तो इसका सीधा असर हमारी दृष्टि की क्षमता पर पड़ता है। यह बदलाव भीतरी-बाहरी, स्थायी और अस्थायी दोनों ही प्रकार के हो सकते  हैं। इन बदलावों और असामन्याताओं के आधार पर ही इनके प्रभाव और दुष्प्रभाव भी अस्थायी और स्थायी दोनों ही प्रकार के होते हैं। Image Source

हम अपने इस लेख में आँख में आने वाली कुछ ऐसी स्थायी और अस्थायी असामान्यताओं का उल्लेख कर रहें हैं, जो आँखों को किसी-न-किसी रूप में प्रभावित करती हैं।

आँखों से जुड़ी कुछ सामान्य और असामान्य समस्याएं- मैकुला

  1. मैक्युला का व्यपजनन (एएमडी)- जिसे अंग्रेजी में एज रिलेटिड मैक्युलर डिजनरेशन के नाम से जाना जाता है, इसमें रेटिना यानी दृष्टिपटल के बीच वाले भाग जिसे मैक्युला का जाता है, में कमी आ जाती है।  
  2. आँखों में उभार (ब्लगिंग आई)- यह एक ऐसी समस्या होती है, जिसमें आँखों की भीतरी संरचना या मांशपेशियों में घाव या उसके उत्तकों के फैल जाने के कारण आँखें सामान्य से ज्यादा उभरी हुई महसूस होने लगती हैं।
  3. मोतियाबिंद- मोतियाबिंद आंखों की एक ऐसी बीमारी है, जिसमें आंखों में मौजूद प्राकृतिक लैंस धुंधला हो जाता है, और उस पर एक सफ़ेद रंग की परत चढ़ जाती है। मोतियाबिंद से ग्रस्त व्यक्ति को देखने में कठिनाई होती है। उसे अस्पष्ट दिखाई देता है। बेहद कम मामलों में यह समस्या बच्चों में जन्म के बाद कुछ वर्षों तक भी दिखाई दे सकती है।
  4. दृष्टि पटल शोथ (सीएमवी रिटीनाइटिस)- यह दृष्टि पटल पर होने वाला एक ऐसा भयंकर संक्रमण होता है, जो ज्यादातर एड्स से पीड़ित या फिर प्रतिरक्षा विकार वाले व्यक्तियों को होता है।
  5. रंग दृष्टिहीनता- यह असल में अंधेपन से जुड़ी समस्या नहीं होती, बल्कि रंगों को पहचानने की क्षमता में कमी होती है। इस रोग से पीड़ित व्यक्ति रंगो में फर्क और पहचान नहीं कर पाता।
  6. बहंगापन (स्ट्रैबिस्मस)- यह एक ऐसी समस्या होती है, जिसमें आँखों की पुतलियां एक साथ एक दिशा में न घूम कर अलग-अलग दिशाओं में घूमती हैं।
  7. मधुमेह मैक्यूलर एडिमा- यह समस्या आँखों के मैक्युला में तरल इकट्ठा होने के कारण होती है। इसमें व्यक्ति को चीजें धुँधली दिखाई देनी शुरू हो जाती हैं।
  8. तिरमिरे या तिरमिरा (नेत्र फ़्लोटर्स और आई फ्लैश)- इस समस्या में रोगी को आँखों के सामने छोटे-छोटे बिंदु या बादल जैसे तैरते दिखाई देते हैं। यह ख़ास तौर पर तब होता है, जब व्यक्ति प्रकाश या किसी सपाट स्थान की तरफ देख रहा होता है।
  9. पलकों की फड़कन (आईलिड ट्विचिंग)- इसमें व्यक्ति को पलकों में झटका या अलग सी हलचल महसूस होती है।
  10. कांचबिंदु या काला मोतिया (ग्लूकोमा)-  काला मोतिया वह समस्या होती है, जिसमें आँखों की भीतरी संरचना में तरल के निर्माण से आँखों की तंत्रिका नष्ट होने लगती है।
  11. शंकुक-स्वच्छपटल (केरेटोकोनस)-  इस समस्या में कॉर्निया जो आम तौर पर गोल आकार का होता है, एक शंकु के जैसा दिखने लगता है और इसीलिए इसे शंकुक-स्वच्छपटल के नाम से जाना जाता है।
  12. मंददृष्टिता (एम्ब्लोपिया)- जिसे सुस्त आई या लेज़ी आई के नाम से भी जाना जाता है एक ऐसी समस्या है, जो आम तौर पर एक ही आँख में पनपती है। यह बचपन में पनपने वाला रोग है। इस समस्या के चलते बचपन से ही एक आँख का प्रयोग नहीं हो पाता।
  13. ऑकुलर हाईपरटेन्शन- इस समस्या में भी आँख की भीतरी संरचना में तरल का निर्माण हो जाता है, इस तरह के दबाव को इंट्राऑक्यूलर दबाव कहा जाता है।
  14. दृष्टिपटल का उत्तकों से अलग हो जाना (रेटिनल डिटेचमेंट)- इस बिमारी में व्यक्ति का रेटिना यानी दृष्टिपटल आँखों के उत्तकों से अलग हो जाता है।
  15. आँख की भीतिर झिल्ली की सूजन (यूवाइटिस)- यह आँख की मध्य परत या झिल्ली में आई वह सूजन होती है, जो ख़ास तौर पर आँखों के तीन हिस्सों को प्रभावित करती है, जो इस झिल्ली का निर्माण करते हैं।
  16. आँख का सूखापन (ड्राई आइ सिंड्रोम)– इसमें आँखों में नमी बनाये रखने वाले पानी या तरल का निर्माण कम होने लगता है। ध्यान न दिए जाने पर यह समस्या, धुंधली दृष्टि और नजर कमजोर होने जैसी समस्याओं को भी जन्म दे सकती है।
  17. अंजनहारी- एक ऐसी समस्या होती है, जिसमें आँख की ऊपरी या निचली पलर्कों के बीचो-बीच एक फुंसी उभर आती है। यह समस्या गंभीर नहीं होती और आँखों को नुकसान भी नहीं पहुँचाती लेकिन इससे तकलीफ जरूर होती है।
  18. रतौंधी- यह ऐसी समस्या होती है, जिसमें रोगी को रात में दिखाई देना बिलकुल बंद हो जाता है।
  19. आँख आना (नेत्रश्लेष्मलाशोथ)- यह समस्या गर्मियों में देखने को मिलती है, जिसमे व्यक्ति की आँखें भयंकर रूप से लाल हो जाती हैं। वह उन्हें खोल नहीं पाता, उनमें जलन होती है और सुबह सोकर उठने पर वह चिकपी हुई मिलती हैं। यह एक तरह का बाहरी झिल्ली का संक्रमण होता है।
  20. आँख से पानी आना (अश्रुपात)- इस समस्या के रोगियों की आँखों से अकारण ही पानी गिरता रहता है। इसका कारण आँख की ऊपरी सतह का संक्रमण होता है। यह एलर्जी के कारण भी हो सकता है।  

इन समस्याओं के अलावा कई बार किसी दुर्घटना के चलते भी आँखों से जुड़ी हानि का सामना व्यक्ति को करना पड़ सकता है। यहाँ तक कि कई बार तो व्यक्ति अपनी आँखें भी खो देता है। वहीँ जो व्यक्ति आँखों में स्थायी लेंस डलवा चुके हैं, कुछ मामलों में उनमें भी परेशानियां देखने को मिल जाती हैं।

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