मैक्यूलर डिजनेरेशन के कारण

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23rd December, 2017

मैक्यूलर डिजनेरेशन एक ऐसी समस्या है, जो बढ़ती उम्र के साथ पनपती है और आँखों की रौशनी को धुंधला बना देती है। यह समस्या क्यों और किन कारणों से होती है, इसकी सही जानकारी तो शायद अभी तक किसी के पास नहीं है, लेकिन इसके सबसे मुख्य कारण आनुवंशिकता और पर्यावरणीय कारकों को समझा जाता है। इनके अलावा, उचित पोषण की कमी और शरीर और आँखों के स्वास्थ्य को कमज़ोर बनाने वाली गलत आदतें जैसे एल्कोहल का सेवन और धूम्रपान भी इसके कारकों में गिने जाते हैं।

मैक्यूलर डिजनेरेशन जो रेटिना के मैक्युला को प्रभावित करती है इसमें आँखों के रेटिना पर पीले रंग के धब्बे बन जाते हैं। इन्हीं धब्बों की वजह से व्यक्ति को देखने में परेशानी होने लगती है। दरअसल यह धब्बे रेटिना पर एक दम उस स्थान पर पनपनते हैं, जिससे आँखों को साफ़ दिखाई देता है।

मैक्यूलर डिजनेरेशन को बढ़ावा देने वाले कारक-

  • उम्र- इस समस्या का ख़तरा बढ़ती उम्र के साथ ही पनपता है। 60 से 65 वर्ष के बीच यह समस्या आम हो जाती है।
  • अनुवांशिकता- यदि किसी के घर में पहले से यह समस्या हो तो अगली पीढ़ी में इसके होने की आशंका बढ़ जाती है।
  • धूम्रपान- जो व्यक्ति धूम्रपान के आदि हों, या जिन्हें इसके धुएं के बीच रहना पड़ता हो उनमें भी  मैक्यूलर डिजनेरेशन के होने की आशंका बढ़ जाती है।
  • मोटापा- मोटापा अपने आप में एक ऐसी समस्या है, जो किसी भी छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी समस्या के पनपने की आशंका शरीर में बढ़ा देता है। वहीं जिन्हें यह समस्या हो चुकी हो, उनमें यह तेजी से बढ़ती भी है।
  • हृदय रोग- जिन व्यक्तियों को हृदय से जुड़े रोग हों उनमें भी मैक्यूलर डिजनेरेशन के होने की आशंका ज़्यादा रहती है।

बिमारी बढ़ने की अवस्था में व्यक्ति को तनाव और मतिभ्रम जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। वहीं मैक्यूलर डिजनेरेशन जिसकी शुरुआत ड्राई (सूखे) मैक्यूलर डिजनेरेशन से होती है, बढ़ते-बढ़ते यह खुद ही नम मैक्यूलर डिजनेरेशन में भी परिवर्तित हो सकता है। इसीलिए इसकी समय पर जाँच और रोकथाम आवश्यक होती है।

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