आँखों की लेसिक सर्जरी से होने वाले जोख़िम

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28th November, 2017

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Lasik surgery ke jokhim aur dushprabhav | लेसिक सर्जरी के जोखिम और दुष्प्रभाव | Lasik Surgery Risks and Side Effectsलेसिक (लेज़र असिस्टेड इन सीटू कीराटोमिलेयुसिस) सर्जरी आँखों का लेज़र की मदद से किया जाने वाला ऑपरेशन होता है। इस सर्जरी से मायोपिया, हयपरोपिया और एसटिगमेटिजम जैसे आँखों के विकारों को ठीक किया जाता है। लेसिक सर्जरी आँखों के विशेषज्ञ डॉक्टर (ऑप्थल्मोलॉजिस्ट) द्वारा की जाती है, जिसमे लेज़र या माइक्रोकीराटोम का इस्तेमाल होता है। इस ऑपरेशन की सफलता की दर बहुत अच्छी है लेकिन कभी-कभी सर्जरी के बाद, लोगो को कुछ विकार या समस्याएं हो सकती हैं।

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लेसिक सर्जरी के जोख़िम

आँखों का ओवरकरेक्शन या अंडरकरेक्शन- लेसिक सर्जरी के दौरान, कभी-कभी यह संभावना होती है कि व्यक्ति की आँखें सही दृष्टि (विज़न) से ज़्यादा या कम ठीक हो जाएं। ऐसे में, सही विज़न के लिए दोबारा सर्जरी (एन्हेंस्मेंट) करानी पड़ती है। एक सर्जरी के तुरंत बाद दूसरी सर्जरी नहीं की जा सकती इसलिए कुछ महीनों तक व्यक्ति को वैसी नज़र के साथ ही रहना पड़ता है। कुछ लोगो की कॉर्निया का आकार कम होने की वजह से उनकी दूसरी सर्जरी संभव नहीं होती।

आँखों में संक्रमण और नज़र का कम होना- सर्जरी के बाद, आँखों में संक्रमण होने का खतरा अधिक होता है। इस संक्रमण से आँखों की रौशनी कम हो सकती है या पूरी तरह जा सकती है। लेसिक सर्जरी में यह जोखिम 10000 ऑपरेशन में से एक में हो सकता है।

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एबरेशन- हायर आर्डर एबरेशन आँखों से जुड़ी ऐसी समस्याएं होती हैं, जिनकी जांच के लिए सामान्य से अलग टेस्ट की ज़रुरत पड़ती है। जैसे आँखों के सामने चमक आना, एक हिस्से में कालापन या कभी-कभार अँधेरा छाना आदि। प्यूपिल के बदले आकार के कारण हायर आर्डर एबरेशन की समस्याएं अधिक होने लगती हैं।

आँखों का सूखना- सर्जरी के बाद ड्राई ऑय या आँखों का सूखना एक आम समस्या है। हालांकि, अधिकतर मामलों में यह समस्या कुछ दिनों या हफ्तों में ठीक हो जाती है। बहुत कम मामलों में सर्जरी के बाद ड्राई आई सिंड्रोम हो सकता है। जिनके इलाज के लिए आर्टिकिशल टीयर्स, प्रिस्क्रिप्शन टीयर्स और पंक्चुअल ऑक्लुसन का इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही लेसिक सर्जरी के बाद सबकंजकवाइटल हेमरेज में आँखों के कुछ हिस्से में खून जमा हो सकता है।

इस सर्जरी के बाद आँखों की पुतलियों में समस्या, कॉर्निया का फूलना, लेसिक फ्लैप का आँखों पर सही से न जमना जैसी कुछ अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं। वैसे इन समस्याओं के होने की संभावना काफी कम होती है। व्यक्ति को सभी जांचो के बाद अपनी स्थिति और डॉक्टर की सलाह अनुसार ही लेसिक ऑपरेशन करवाना चाहिए।

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