मोतियाबिंद को लेकर व्याप्त कुछ गलतफहमियां

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17th November, 2015

Motiyabind Tathya banam Mithak | मोतियाबिंद तथ्य बनाम मिथक | Glaucoma Facts Versus Mythsमोतियाबिंद जो आज उम्रदराज लोगों में एक बेहद आम बिमारी होती जा रही है। इसे लेकर कुछ गलतफहमियां भी हैं, जो चली आ रही है। मोतियाबिंद के बारे में, समझा जाता है कि यह बिमारी सिर्फ उम्रदराज लोगों को ही होती है। वहीं लोग इसका इलाज कराने से भी डरते हैं। वहीं यह भी माना जाता है कि मोतियाबिंद यदि किसी को एक आँख में है तो वह दूसरी आँख में भी हो जाएगा।

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हालाँकि इस तरह की गलतफहमियों का कारण, सिर्फ इस बारे में जानकारी की कमी ही माना जाएगा, और इन सब गलतफहमियों को दूर करने का तरीका भी, यही है कि आप इसके बारे में ज्यादा से ज्यादा जानें।

गलतफहमियां-

सिर्फ उम्रदराज लोगों को ही होता है मोतियाबिंद– धारणा है कि मोतियाबिंद कम उम्र में नही होता और इसकी नियत उम्र 65 वर्ष और इस से अधिक होती है। लेकिन ऐसा नहीं है, और यह बिमारी कम उम्र के लोगों को भी हो सकती है। यहाँ तक कि कभी-कभी तो यह जन्म के समय से भी मौजूद हो सकता है।

मोतियाबिंद की सर्जरी से पहले उसका पूरी तरह से पका हुआ होना जरुरी है- माना जाता था कि मोतियाबिंद की सर्जरी तभी की जा सकती है जब वह पूरी तरह से पक चुका हो, लेकिन अब ऐसा नहीं है। बल्कि इसके निकाले जाने के लिए इसका पका होना जरुरी नहीं है। आप इसे अपनी सुविधानुसार कभी भी निकलवा सकते हैं।

खतरनाक भी हो सकती है मोतियाबिंद की सर्जरी- यह भी एक मिथ है कि मोतियाबिंद के लिए की जाने वाली सर्जरी सुरक्षित नहीं है, और इस से आँखों को नुकसान हो सकता है। लेकिन यह सच नहीं है। मोतियाबिंद के लिए की जाने वाली सर्जरियों में से 95 % मामले सफल ही होते हैं।

सर्जरी के बाद आँख को सामान्य अवस्था में आने में बहुत समय लगता है- हो सकता है कि कुछ लोगों को सर्जरी के बाद सामान्य होने में थोड़ा ज्यादा समय (एक महीना) लगे। लेकिन सच्चाई यह है कि सर्जरी के एक हफ्ते के अंदर ही आप सामान्य महसूस करना शुरू कर देते हैं और आपको पहले के मुकाबले साफ़ दिखना शुरू हो जाता है। वहीं सर्जरी के बाद आपको कुछ समय तक आँखों का खास ख्याल भी रखना होता है। आपको डॉक्टर के द्वारा बताए गए निर्देशों का पालन करना बेहद आवश्यक है।

मोतियाबिंद की सर्जरी के बाद चश्मे की जरूरत को लेकर गलतफहमी- कुछ लोगों का मानना है कि एक बार सर्जरी के बाद, चश्मे की जरूरत नहीं पड़ती। हाँ कुछ मामलों में यह बात सच भी है, लेकिन ऐसा कोई जरुरी भी नहीं होता। दरअसल चश्मे की जरूरत होना, या न होना आपकी अपनी स्वास्थ्य स्थिति और आपके द्वारा डलवाए गए लेंस पर निर्भर होता है।

एक आँख से दूसरी में भी फ़ैल सकता है मोतियाबिंद- कुछ लोगों का यह भी मानना है कि मोतियाबिंद एक आँख से, दूसरी में भी फ़ैल सकता है। लेकिन यह बात सच भी नहीं है। हो सकता है कि मोतियाबिंद एक आँख में होने के बाद दूसरी में भी हो जाए, लेकिन इसका यह मतलब बिलकुल भी नही है कि यह एक आँख से दूसरी में आया है।



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