मोतियाबिंद के लक्षण और पहचान

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30th January, 2018

मोतिया में आँख के साफ़ शीशे पर बादल या धुंए जैसी संरचना या धब्बा बन जाता है। यह लेंस के उत्तकों में आई कमज़ोरी के कारण होता है। आँखों के लेंस पर जमा यह धुंआ व्यक्ति के देखने की शक्ति को जीर्ण कर देता है। हालाँकि इसकी गति इतनी धीमी होती है कि काफी समय तो रोगी को देखने में किसी प्रकार की कोई दिक्कत महसूस नहीं होती, लेकिन समय के साथ-साथ जैसे-जैसे मोतिया बढ़ता जाता है, यह देखने की प्रक्रिया में बाधा डालने लगता है।

धीरे-धीरे आँखों की रौशनी को प्रभावित करता मोतिया, कई सारी समस्याओं को उत्पन्न कर देता है। चलिए देखते हैं, मोतिया के मरीजों को क्या-क्या परेशानी होने लगती है, या किस तरह के लक्षण नज़र आते हैं।

मोतियाबिंद के लक्षण

  • मोतियाबिंद के रोगियों की नज़र तो कमज़ोर होती ही है साथ ही चीजें धुंए में ढकी सी नज़र आती है, यानी धुंधलापन लिए नज़र आती हैं।
  • मोतिया में रात को देखना और भी मुश्किल हो जाता है।
  • मोतिया के मरीज प्रकाश की ओर नहीं देख पाते और किसी चीज को घूरने पर भी उन्हें परेशानी होती है।
  • अक्षर साफ़ नज़र नहीं आते और उन्हें पढ़ने के लिए स्वस्थ लोगों के मुकाबले ज्यादा प्रकाश की ज़रूरत होती है।
  • प्रकाश वाली वस्तु के इर्द-गिर्द घेरा (आभामंडल) यानी घेरा नज़र आता है।
  • इसके रोगी को चश्मा जल्दी-जल्दी बदलवाना पड़ता है।
  • गाढ़े रंग भी धुंधले दिखाई देते हैं।
  • कभी-कभी चीजें दो भी दिखाई देती हैं।

मोतिया की शुरुआत में रोगी को तेज रौशनी और चश्मे की मदद से इतनी दिक्कत नहीं होती, लेकिन धीरे-धीरे जैसे-जैसे मोतिया बढ़ता जाता है, चश्मा और तेज रौशनी में भी वह ठीक से देख और पढ़ नहीं पाता। अंत में मोतिया का उपचार सर्जरी के द्वारा ही कराया जाता है क्योंकि बिना सर्जरी के सिर्फ इसकी गति को धीमा किया जा सकता है, इसे पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता।



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