माइग्रेन समेत कई परेशानियों में रामबाण है आकाश मुद्रा

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24th May, 2017

Akash Mudra ke fayde kya hein? | आकाश मुद्रा के फ़ायदे क्या हैं? | What are the benefits of Akash Mudra? योग मुद्राएँ केवल अध्यात्म से संबंधित या ऋषियों और योगियों की क्रियाएँ नहीं हैं। इनमें व्यक्ति को स्वस्थ रखने और अनेकों बीमारियों से बचाने के साथ-साथ उनके उपचार की क्षमता भी मौजूद है। योग की अनेक मुद्राओं में एक मुद्रा है आकाश मुद्रा, यह आयुर्वेद के अनुसार शरीर के पाँच तत्वों आकाश तत्व में बढ़ोत्तरी करता है। इसलिए यह मुद्रा इस तत्व की कमी से होने वाली परेशानियों को दूर करता है।

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आकाश मुद्रा बनाने की विधि

आकाश मुद्रा का अभ्यास करने के लिए व्यक्ति को पद्मासन, सुखासन अथवा वज्रासन में बैठकर, दोनों हाथों की मध्यिका (सबसे बड़ी) ऊँगली के अगले हिस्से को अँगूठे के अगले हिस्से से मिलाएँ। शरीर में मध्यिका ऊँगली आकाश का प्रतिनिधित्व करती है और अँगूठा अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करता है। इन दोनों के शरीर में आकाश तत्व की वृद्धि होती है।

सावधानी

वात प्रकृति वाले व्यक्तियों को आकाश मुद्रा का अधिक अभ्यास नहीं करना चाहिए। जिन व्यक्तियों की त्वचा सूखी, गैस, आम-वात और गठिया आदि की समस्या होती है उन लोगों के शरीर में वात तत्व की अधिकता होती है।

फायदे

आकाश मुद्रा के अभ्यास से होने वाले लाभ निम्नलिखित हैं –

  • माइग्रेन या साइनसाइटिस के कारण होने वाले सिर दर्द में राहत देती है
  • संक्रमण के कारण होने वाले कान के दर्द में राहत देती है  
  • संक्रमण के कारण अथवा अस्थमा के कारण होने वाले छाती/सीने के दर्द में राहत देती है
  • इस मुद्रा के द्वारा शरीर में चयापचय की क्रिया में पैदा होने वाले अपशिष्ट पदार्थों, जैसे -कार्बनडाइऑक्साइड , पसीना, मूत्र और मल को नष्ट कर शरीर को विषाक्त तत्वों से मुक्त किया जाता है  
  • यह मुद्रा अच्छे और ऊचें विचारों के विकास में मदद करती है  
  • यह मुद्रा शरीर में वात प्रकति को भी बढ़ा देती है  
  • उच्च रक्त चाप को नियंत्रित करती है।
  • शरीर या शरीर के कुछ हिस्सों में फुलाव/भारीपन लग रहा हो तो उसको दूर करने के लिए भी यह मुद्रा कारगर है
  • अधिक खाने के कारण परेशानी को दूर करती है
  • अनियमित दिल की धड़कन को ठीक करती है
  • एंजाइना पेक्टोरिस बीमारी में आराम करती है। ( एक प्रकार का सीने का दर्द जो हृदय को रक्त आपूर्ति कम होने के कारण होता है । कभी-कभी यह दर्द सीने से कंधे, गले और हाथों तक भी पहुंच जाता है)।

अवधि

हर दिन 30 से 45 मिनट, या तो एक बार में या तीन बार में 10 से 15 मिनट के लिए। आकाश मुद्रा के करने का सबसे अच्छा समय सुबह या शाम 2 बजे से 6 बजे के बीच होता है।

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