एक मनुष्य की रक्त वाहिकों से दो बार लपेटी जा सकती है दुनियां

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27th May, 2017

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रक्त वाहिकाएं कितने प्रकार की होती हैं? | Rakt vahikaen kitne prakar ki hoti hain? | what are the types of blood vessels

हमने अपने लेख  हृदय की बनावट: ठीक आपकी मुट्ठी के जितना होता है आपका हृदय

में हृदय के चारों वाल्व और उनके द्वारा रक्त संचार के बारे में लिखा, अब वहीं हम शरीर में उन रक्त वाहिकाओं (धमनियों) के कार्यों के बारे में बात कर रहें हैं, जो रक्त को हृदय से लेकर पूरे शरीर में लेकर जाती हैं।

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रक्त वाहिकाएं, जो शरीर की संचार प्रणाली का हिस्सा होती हैं, हमारे पूरे शरीर में जाल की तरह फैली होती हैं। रक्त वाहिकाएं तीन प्रकार की होती हैं, आर्टरी (धमनी), केशिकाएं (कैपिलरी) और नसें। ये तीनों ही शरीर में रक्त संचार का कार्य करती हैं, लेकिन फिर भी तीनों के काम अलग-अलग होते हैं।  

शरीर की तीनों रक्त कोशिकाओं के अलग-अलग कार्य-  

आर्टरी- यह सबसे बड़ी रक्त वाहिका होती है और हृदय के राइट वेंट्रिकल से निकलती है। हृदय द्वारा पम्प किये गए रक्त को पूरे शरीर में लेकर जाती हैं।  

केशिकाएं (कैपिलरी)- यह सबसे पतली रक्त वाहिकाएं होती हैं और यही शरीर की कोशिकाओं और उत्तकों से केमिकल और गैस और अन्य हानिकारक तत्वों को इकठ्ठा करती हैं और उन्हें, रक्त, ऑक्सीजन,पानी और पोषक तत्व प्रदान करती हैं।

नसें (वेन)- यह दूषित रक्त को कैपिलरी से लेकर उसे वापिस हृदय में लेकर जाती हैं।

नसें रक्त को हृदय के राइट आट्रियम में लेकर जाती हैं और यही रक्त पहले राइट वेंट्रिकल में जाता है और वेंट्रिकल इसे फेफड़ों में शुद्धि के लिए भेज देता है। वहां फेफड़े रक्त से दूषित तत्वों और गैसों को साँसों के द्वारा बाहर निकाल देते हैं और ऑक्सीजन खींच कर रक्त को दे देते हैं।

कैसे काम करती हैं रक्त की तीनों मुख्य वाहिकाएं-

  • महाधमनी (एओर्टा)- महाधमनी, यह हमारे शरीर की सबसे बड़ी रक्त वाहिका होती है और इसी से हृदय रक्त को पूरे शरीर में पम्प करता है। एओर्टा हृदय के लेफ्ट वेंट्रिकल से निकलती है। यह हृदय से ऑक्सीजन युक्त रक्त को लेती है और उसे पूरे शरीर तक लेकर जाती है। यह शरीर में जितनी दूर तक जाती रहती है, यह और पतली और शाखाओं में बंटती चली जाती है। यह एक और तो हृदय से और दूसरी और कैपिलरी रक्त वाहिकाओं से जुड़ी होती है।
  • केशिकाओं (कैपिलरी)- यह बहुत छोटी-छोटी और पतली रक्त वाहिकाएं होती हैं। यह धमनी और नसों को आपस में जोड़ती हैं। यह शरीर की कोशिकाओं से, अपशिष्ट पदार्थों को लेकर उन्हें नसों में भेज देती हैं और ताजे रक्त को उत्तकों और कोशिकाओं तक पहुंच देती हैं।
  • नसें- कैपलरी से दूषित रक्त को लेकर उसे वापिस हृदय तक लेकर जाती है। सबसे बड़ी नस वेना कावा जो हृदय के राइट आट्रियम से जुड़ीं होती है और उसी में रक्त को वापिस लेकर जाती है। ताकि राइट आट्रियम इसे पहले राइट वेंट्रिकल में और फिर राइट वेंट्रिकल फेंफड़ो में भेजकर शुद्ध करा सके। हमारे शरीर में रक्त परिसंचरण की यह प्रक्रीया निरंतर चलती रहती है।

वेना कावा- वेना कावा जो कार्बन डाई ऑक्साइड और अन्य विषैले तत्वों से युक्त रक्त को हृदय तक लेकर जाती है, यह एओर्टा के बाद सबसे बड़ी रक्त वाहिका होती है। वेना कावा भी दो तरह की होती है, एक तो सुपीरियर वेना कावा और दूसरी इंफीरियर वेना कावा।

सुपीरियर वेना कावा- सुपीरियर वेना कावा वह वाहिका होती है, जो मस्तिष्क और भुजाओं से दूषित रक्त को इकठ्ठा करके हृदय तक पहुंचाती है।

इन्फीरियर वेना कावा- शरीर के निचले हिस्से यानी, पेट, फेफड़ों और टांगों से हृदय तक लेकर जाती है।

एक मनुष्य में, इतनी रक्त वाहिकाएं होती हैं, जिनसे पूरे विश्व को लगभग दो बार लपेटा जा सकता है। हमारे शरीर में इन्हीं रक्त वाहिकाओं से रक्त निरंतर बहता रहता है। हमारी रक्त वाहिकाओं की लंबाई  60,000 मील से भी ज्यादा होती है।

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