कैसे उच्च कोलेस्ट्रॉल बन जाता है हृदय के लिए खतरा?

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23rd September, 2015

Kaise Uchh Cholesterol ban jata hai Hridaya ke liye Khatara ? | कैसे उच्च कोलेस्ट्रॉल बन जाता है हृदय के लिए खतरा? | How does Cholesterol Increase the Risk of Heart Disease? जब शरीर में अत्यधिक मात्रा में कोलेस्ट्रॉल इकठ्ठा हो जाता है तो यह धमनियों की दीवारों में जमने लगता है। जिससे धमनियों की दीवारें कठोर होने लगती है, इस प्रक्रिया को एथेरोसिरोसिस (Atherosclerosis ) कहते हैं। यह स्थिति धमनियों की दीवारो को सँकरा बना देती है। इसकी वजह से रक्त प्रवाह कम हो जाता है। यहीं से हृदय के लिए परेशानी शुरू हो जाती है। जब हमारी धमनियां संकीर्ण हो जाती है तो उनमें से रक्त के साथ-साथ ऑक्सीजन की मात्रा भी कम गुजरती है और इस से हमारे शरीर को भरपूर मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। बिना पर्याप्त ऑक्सीजन हमारा शरीर ठीक से काम नहीं कर पाता। उदाहरण के लिए, अगर आप के हृदय को पर्याप्त मात्रा में रक्त और ऑक्सीजन नहीं मिले तो आपको सीने में दर्द की शिकायत शुरू हो जाती है। अगर हृदय के किसी भाग तक रक्त नहीं पहुंचेगा तो आपको हार्ट अटैक का खतरा भी हो सकता है।

दो प्रकार का होता है कोलेस्ट्रॉल:

1. कम-घनत्व वाले लिपोप्रोटीन LDL (Low-density lipoprotein or LDL), यानी “ख़राब ” कोलेस्ट्रॉल।
2. उच्च-घनत्व वाले लिपोप्रोटीन HDL ( high-density lipoprotein or HDL) यानी “अच्छा ” कोलेस्ट्रॉल।

LDL मुख्य रूप से पट्टिका का निर्माण करके धमनी में रक्त प्रवाह को रोकता या कम करता है और HDL इसके ठीक विपरीत, कोलेस्ट्रॉल को धमनी की दीवारो से साफ़ करता है।

LDL और HDL के अलावा, आपके रक्त में ट्राइग्लिसराइड्स नामक वसा भी होती है। रिसर्च के द्वारा ये प्रमाणित किया गया है की LDL और ट्राइग्लिसराइड्स ही हृदय रोग से समन्धित है।

उच्च कोलेस्ट्रॉल के लक्षण

उच्च कोलेस्ट्रॉल के कोई खास लक्षण नहीं होते हैं और आपको यह पता भी नहीं चल पाता कि आपका कोलेस्ट्रॉल बढ़ गया है इसलिए रक्त परीक्षण के माध्यम से आप अपना कोलेस्ट्रॉल स्तर चेक करा सकते हैं। अगर आपका कोलेस्ट्रॉल का स्तर अधिक हो तो उसे कम करें और हार्ट अटैक के खतरों से बचें। और साथ ही आप को पहले से ही हृदय रोग है तो अपने कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बराबर बनाये रखें और हार्ट अटैक और हृदय की बीमारियो से बचें।

कोलेस्ट्रॉल की जाँच

अगर आपकी उम्र 20 से अधिक है, तो आपके डॉक्टर को हर पांच साल में कम से कम एक बार आपके कोलेस्ट्रॉल की जाँच करनी चाहिए। यह एक लिपिड प्रोफाइल नामक, साधारण रक्त परीक्षण होता है। इस परीक्षण में आप निम्नलिखित चीजों को देखते हैं:

  • कुल कोलेस्ट्रॉल स्तर
  • HDL का स्तर
  • LDL का स्तर
  • ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर

आपके कोलेस्ट्रॉल के स्तर के माध्यम से आपका चिकित्सक आपको ये बता सकता है कि आपको हृदय की बीमारी का खतरा है या नहीं। अगर आपका LDL का स्तर 190 से ज्यादा है तो इसे उच्च स्तर का ख़राब कोलेस्ट्रॉल माना जाता है और डॉक्टर इसे कम करने के लिए, आपको दवाइयाँ देता है। और अगर आपका HDL का स्तर 60 से ज्यादा है तो ये आपके लिए ख़ुशी की बात है मतलब आपको हृदय रोग और हार्ट अटैक का खतरा कम है। इसलिए आपको हृदय की बीमारियों से निजात पाने के लिए HDL को ज्यादा और LDL के स्तर को कम रखना चाहिए।

कोलेस्ट्रॉल के स्तर के अलावा, चिकित्सक कुछ और कारकों को भी देखते हैं जैसे आपकी उम्र, रक्तचाप, धूम्रपान का इतिहास, और रक्तचाप की दवाओं का उपयोग। हृदय की बीमरियों में ये भी महत्वपूर्ण भूमिका निभातें हैं। अगर आपको पहले से ही हृदय की बीमारी है तो यह पता चल सकता है कि अगले 10 वर्षों में आपको प्रमुख हृदय समस्याओं की संभावना है या नहीं। इन सब चीज़ों से आप और आपके डॉक्टर इसे कम करने के लिए एक रणनीति विकसित कर सकते हैं। इस रणनीति के द्वारा, आप स्वस्थ आहार और संभवतः दवाओं के माध्यम से अपने कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम कर सकते हैं।

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