कार्डियक कैथीटेराइजेशन

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19th August, 2015

Untitled design (43)कार्डियक कैथीटेराइजेशन एक ऐसा टेस्ट है जिसमें हृदय की जाँच की जाती है। इस टेस्ट के दौरान एक पतली और लचीली ट्यूब को, जिसे कैथिटर (Catheter) कहा जाता है, रक्त वाहिकाओं द्वारा हृदय (Heart) तक पहुंचाया जाता है। इस टेस्ट में कोरोनरी धमनियों (Coronary Arteries) को चेक करने के लिए कोरोनरी एंजियोग्राम (Coronary Angiogram) भी शामिल हो सकता है।

कार्डियक कैथीटेराइजेशन के द्वारा कोरोनरी धमनियों में रक्त के बहाव की जाँच की जाती है। इसके अलावा यह हृदय के अलग-अलग हिस्सों के कार्यों की भी जाँच करता है। जिनमें हृदय के कक्ष (Heart Chamber), उसकी दीवारें और वाल्व शामिल हैं। बच्चों में इस टेस्ट का प्रयोग उनमें होने वाली जन्मजात हृदय समस्या (Congenital Heart Defect) की जानकारी के लिए किया जाता है।

कोरोनरी एंजियोग्राम टेस्ट (Coronary Angiogram Test) का प्रयोग कोरोनरी धमनियों (Atherosclerosis) की बीमारी की जाँच के लिए किया जाता है। इस टेस्ट में जमे हुए उस कैल्शियम की जानकारी मिल सकती है जो कोरोनरी धमनियों को संकीर्ण बना सकता है।

परक्यूटैनियस कोरोनरी इंटरवेन (PCI) भी कोरोनरी एंजियोग्राम के जैसा ही होता है। लेकिन इसका प्रयोग संकीर्ण हुई कोरोनरी धमनियों को एक खास उपकरण द्वारा खोलने के लिए किया जाता है। इन उपकरणों में PCI भी शामिल है।

  • कोरोनरी स्टेंट (Coronary Stent) के साथ या उनके बिना एंजियोप्लास्टी (Angioplasty)
  • अथेरेक्टॉमी (Atherectomy)

कोरोनरी एंजियोग्राम जाँच के द्वारा पता चल सकता है कि आपके लिए कौन सा उचार है जो बेहतर रहेगा। इसमें दवाइयाँ, बाईपास सर्जरी (Bypass Surgery), परक्यूटैनियस कोरोनरी इंटरवेंशन ( Percutaneous Coronary Intervention-PCI)) जैसे कि एंजियोप्लास्टी शामिल हैं।

स्वास्थ्य उपकरण (हेल्थ टूल)
स्वास्थ्य टूल (Health Tools) किसी भी व्यक्ति को उसके स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लेने और उनके प्रति सख्त कदम उठाने में मदद करते हैं।

कार्डियक कैथीटेराइजेशन इन स्थितियों में कराया जा सकता है:

  • हार्ट चैंबर्स में रक्त के प्रवाह और उसके दबाव की जाँच के लिए।
  • हार्ट पम्पिंग के कार्यों की जांच के लिए।
  • यह पता करने के लिए कि यदि जन्मजात हार्ट से जुड़ी समस्याएँ हैं तो वह कितनी घातक है। कभी-कभी कार्डिएक कैथीटेराइजेशन का
  • प्रयोग इन विकारों से निजात पाने के लिए भी किया जाता है।
  • सर्जरी के बाद हृदय के माध्यम से होने वाले रक्त प्रवाह की जाँच।
  • हार्ट वाल्व के बेहतर काम करने या न करने की जाँच।

निम्न स्थितियों में किया जाता है कोरोनरी एंजियोग्राम
कोरोनरी धमनियों में रक्त के प्रवाह की जांच के लिए। यदि जाँच में कोरोनरी धमनियों में कोई विकार सामने आता है, तो यह जाँच आपके उपचार में लाभदायक सिद्ध होगी। इस से पता चलेगा कि आपको सर्जरी की जरूरत है या दूसरे प्रकार के स्टेटिंग के साथ एंजियोप्लास्टी की जरूरत है।

कैसे करें कार्डिएक कैथीटेराइजेशन की तैयारी?

  • यदि इनमें से कोई भी समस्या है तो उसके बारे में अपने डॉक्टर को जरूर बताएं-
  • यदि आप एंजियोग्राम करवा रहें हैं और आपको कॉन्ट्रास्ट मटीरियल में प्रयोग होने वाले आयोडीन डाई या ऐसे किसी अन्य पदार्थ से एलर्जी है जिसमें आयोडीन हो।
  • टेस्ट में प्रयोग होने वाली किसी और सामग्री जैसे लेटेक्स या टैल्क से एलर्जी हो तो।
  • क्या बहुत सी ऐसी दवाइयाँ हैं जिनसे एलर्जी है।
  • किसी भी दवा, विटामिन, पूरक, या हर्बल उपचार का प्रयोग कर रहें हो तो। इनमें से कोई भी चीज रक्त स्त्राव का कारण बन सकती है।
  • इसके अलावा भी कुछ दवाएं हैं जो दूसरी समस्याओं का कारण बन सकती हैं। इसके बारे में पहले ही अपने डॉक्टर से पूछ लें कि आप
  • कौन सी दवाई ले सकते हैं और कौन सी नहीं।
  • दवाइयाँ जो टेस्ट को प्रभावित कर सकती हैं उनमें, रक्त को पतला करने वाली दवाई जैसे, Warfarin, Clopidogrel (Plavix), या Aspirin.
  • इसके अलावा निर्माण दवाएं, जैसे Sildenafil (Viagra), Tadalafil (Cialis), or Vardenafil (Levitra)।
    यदि आप गर्भवती हैं तो या बच्चे को अपना दूध पिलाती हैं तो।
  • यदि आपको अस्थमा या फिर गंभीर एलर्जिक प्रतिक्रिया (तीव्रग्राहिता) की समस्या है तो। यह एलर्जिक प्रतिक्रिया किसी भी पदार्थ
  • जैसे वेनोम (मधुमक्खी के डंक से बना) से हो सकती है।
  • यदि आपको खून बहने जैसी समस्या है तो।
  • यदि आपको किडनी की बीमारी है तो। जिन लोगों को किडनी की समस्या है उनमें जब ऐंजिओग्राम के दौरान कंट्रास्ट मटीरियल का प्रयोग किया जाता है तो मामला और बिगड़ सकता है। यदि ऐसा है तो आपका किडनी टेस्ट पहले से ही कर लिया जाएगा। टेस्ट में आपकी किडनी की स्वस्थ जानकारी आने के बाद ही आपका यह टेस्ट किया जाएगा।

आपको जो भी परेशानियां हैं या जिन भी दवाइयों का प्रयोग कर रहें हैं उनके बारे में डॉक्टर को अपने टेस्ट के होने से पहले बताना जरुरी होता है। क्योंकि यदि आप ऐसा नहीं करते तो इसका सीधा असर आपके टेस्ट और उसकी जाँच पर पड़ेगा। अपने टेस्ट को एक दम उचित तरीके से करवाने के लिए टेस्ट फॉर्म भरें। वहीं टेस्ट के लिए आने पर किसी को अपने साथ लेकर आएं क्योंकि टेस्ट के बाद आप रात भर अस्पताल में नही रहते।

टेस्ट से पहले कम से कम 6-12 घंटे तक कुछ न खाएं। पानी पीया जा सकता है। डॉक्टर के बताएं निर्देशों के अनुसार ही दवाओं का सेवन करें। हो सकता है कि टेस्ट के पहले आपको कुछ दवाओं को छोड़ना पड़ जाए।

टेस्ट से पहले आपने जो ऐसेसरीज (ब्रेसलेट, अंगूठी या दूसरे गहने) आपने पहनी है उसे टेस्ट से पहले ही उतार दें। इसके अलावा आपको अपने हाथों और पैरों के नाखूनों से नेल पोलिश भी उतारनी होगी।

टेस्ट से पहले मूत्राशय (ब्लैडर) को बिलकुल खाली कर दें।

कैसे किया जाता है टेस्ट?
इस टेस्ट को कार्डियक कैथीटेराइजेशन प्रयोगशाला (कैथ लैब) में किया जाता है। इस टेस्ट को एक कार्डियोलॉजिस्ट द्वारा किया जाता है।

टेस्ट से पहले
टेस्ट के लिए आपको एक एक्सरे मशीन के नीचे एक सीधी टेबल पर लेटने के लिए कहा जाएगा। इसके लिए काफी सारे पैड या पैच (इलेक्ट्रोड) आपकी बाँहों और पैरों से जोड़ दिए जाएंगे। इन्हें इलक्ट्रोग्राम (EKG, ECG) मशीन से जोड़ दिया जाएगा। इसके दौरान मशीन द्वारा आपके हृदय की हरकतों और कार्य को देखा जाएगा।

एक डिवाइस जिसे पल्स ऑक्सीमीटर कहा जाता है आपकी ऊँगली पर लगा दी जाएगी। इस से आपके शरीर में ऑक्सीजन के स्तर का पता चलेगा। इसके अलावा यह नब्ज को भी बताएगा।

इसके बाद एक बांह में एक सुई डाली जाएगी। इसका प्रयोग टेस्ट की प्रकिया के दौरान आपके शरीर में कुछ तरल पदार्थ और दवाएं डालने के लिए किया जाएगा। सिर्फ आपकी जाँच के लिए ही नहीं बल्कि जांच के दौरान आपको आराम और सहज करने के लिए भी दवाई का प्रयोग किया जाएगा। हो सकता है कि टेस्ट के दौरान आप जाग रहे हों लेकिन अगर आप जाग रहें हैं तो भी (सिडेटिव) दवाई के कारण आपको नींद आएगी और आपको टेस्ट के बारे में ज्यादा कुछ याद नहीं रहेगा।

टेस्ट के दौरान
सीने का वह स्थान जहाँ कैथेटर को प्रवेश कराया जाना है, पहले वहां के बाल हटा कर कीटाणु रहित किया जाएगा। इसके बाद चिकित्सा सम्बन्धी तौलिया टेस्ट किये जाने वाली जगह के आस-पास लपेट दिया जाएगा। कैथेटर को प्रवेश कराए जाने के लिए भी कुछ परिस्थितयां होती हैं। यदि आप कार्डियक कैथीटेराइजेशन दायें हृदय के चेक अप के लिए ले रहें हैं, तो इसके लिए कैथेटर को गर्दन या कमर की नस में रखा जाएगा। लेकिन यदि यह टेस्ट बाएं तरफ के हृदय या कोरोनरी धमनी के लिए हो रहा है तो कैथेटर को कमर या भुजा की धमनी से प्रवेश कराया जाएगा।

इसके लिए कैथेटर प्रवेश कराए जानी वाली जगह को सुन्न कर दिया जाएगा। इसके बाद एक एक विशेष प्रकार की सुईं से एक नस में पंक्चर किया जाएगा। या फिर उस जगह पर एक चीरा भी लगाया जा सकता है। इसके बाद कैथेटर को धीरे-धीरे शरीर में हृदय की तरफ प्रवेश कराया जाएगा। हृदय में जाकर कैथेटर की लीड्स की नोक अलग-अलग स्थानों पर स्थित हो जाएंगी। इस सारी प्रक्रिया को डॉक्टर स्क्रीन के जरिये देखता रहेगा। इसके अलावा स्क्रीन के द्वारा हृदय पर पड़ रहे दबाव को भी देखा जाएगा। यदि जरूरत पड़ती है तो कैथेटर के द्वारा रक्त और हृदय कोशिकाओं को भी हटाया जा सकता है।

टेस्ट के दौरान आपको आपकी सांसों को कुछ देर रोकने या सिर को एक ओर से दूसरी और खिसकने के लिए कहा जा सकता है। एंजियोग्राम के दौरान बेहद कम मात्रा में कॉन्ट्रास्ट मटीरियल कैथेटर के द्वारा कोरोनरी धमनी में प्रविष्ट कराया जाएगा। जैसे ही यह डाई धमनियों में पहुंचेगी इसे स्क्रीन पर साफ तौर पर देखा जा सकेगा। इसके बाद आपको खांसने के लिए कहा जा सकता है ताकि इस डाई को हृदय से बाहर निकाला जा सके। या फिर आपको एक गहरी सांस भर कर कुछ देर उसे रोकने के लिए भी कहा जा सकता है।

लेकिन इस दौरान आपको कोशिश करनी होगी कि आप शांति से बिना हिले लेटे रहें ताकि स्क्रीन पर तस्वीर साफ रहे धुंधली न हो। इसके लिए स्वास्थ्य से जुड़े प्रोफेशनल आपको मदद करेंगे। इस बात का ख़ास ख्याल रखें कि जिस जगह आप लेटे हुए हैं वहां शीट या कैथेटर की जगह को छुएं नहीं। क्योंकि यदि आप ऐसा करेंगे तो ऐसा करने से हो सकता है कि साफ़ किया हुआ स्थान दूषित हो जाए और ऐसा होने से संक्रंमण होने का खतरा होता है।

आप को नाइट्रोग्लिसरीन भी दी जा सकती है। इस से आपकी कोरोनरी धमनियों को खोलने में मदद मिलेगी। या फिर आपको दवाइयों का एक शॉट दिया जा सकता है जिस से आपकी धमनियां सिकुड़ जाएंगी। आपको एक खास माउथपीस में साँसे छोड़ने के लिए भी कहा जा सकता है। इसकी सहायता से आपके रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा का पता चल जाएगा। इस टेस्ट को करने में कम से कम 30 मिनट का समय लगता है। लेकिन आपको इसके लिए तैयारी करने और बाद में इस से रिकवर होने में वक्त लग जाता है। इसमें कुल 6 घंटे का समय लगता है। इस टेस्ट को पूरा होने में कितना समय लगता है इस बात का आपकी स्थिति की गंभीरता से कोई लेना देना नहीं है।

टेस्ट के बाद
इसके बाद शरीर से कैथेटर को निकाल दिया जाएगा। इसके बाद रक्त को रोकने के लिए उस जगह को बंद कर के वहां दबाव डाला जाएगा। कैथेटर के निकाले हुए स्थान पर कांटे या खास किस्म की सील लगा दी जाएगी। उदाहरण के तौर पर यदि कैथेटर को आपकी कलाई या कमर में रखा गया था तो वहां कम से कम 10 मिनट तक तेज दबाव डाला जाएगा और उस से खून बहना बंद हो जाएगा। इसके बाद उस जगह पर मरहम पट्टी कर दी जाएगी। यदि कैथेटर को कोहनी से रखा गया था, तो इस घाव को बंद करने के लिए वहां कुछ टाँके लगा दिए जाएंगे।

टेस्ट के बाद आपको एक ओब्ज़र्वेशन रूम में रखा जाएगा। समय-समय पर एक स्वास्थ्य पेशेवर उसके रक्त चाप, तापमान और हृदय की धड़कन की जाँच करता रहता है। इसके अलावा कैथेटर की जगह भी खून तो नहीं बह रहा इसकी जांच की जाएगी। इसके अलावा नब्ज, रंग, तापमान, हाथ और पैर इनकी भी जाँच की जाएगी।

टेस्ट के बाद आपको कुछ घंटों तक कैसे लेटना है, किस स्थिति में रहना है यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप के किस हिस्से से कैथेटर को हृदय तक पहुंचाया गया था।यदि ऐसा बाजू से किया गया था, तो आप टेस्ट के बाद भी खड़े हो सकते हैं या बैठ सकते हैं। लेकिन ऐसे में आपको ध्यान रखना होगा कि बाजू को हिलने न दें। लेकिन यदि ऐसा कमर से किया गया था तो आपको 1-4 घटे तक लेटे रहना पड़ता है।

यदि यह टेस्ट किसी छोटे बच्चे में किया जाता है, तो उसके लिए उसके माता-पिता को उसके पास रहकर उसे हिलने-डुलने से रोकना होगा। वहीं टेस्ट के बाद कुछ घंटों तक लगातार खूब सारे तरल पदार्थ भी लेने होंगे। इस से शरीर में पानी की कमी नहीं होगी। इसके अलावा यह शरीर से विरोधी तत्वों को बाहर निकलने में भी मदद करेगा।

आपका घर जाना आपके टेस्ट के रिजल्ट पर निर्भर करता है। हो सकता है कि नतीजे के अनुसार आपको पूरा एक दिन अस्पताल में रखा जाए या फिर 6 घंटों के बाद घर भेज दिया जाए। यदि आपको बाजू में टाँके आए हैं, तो उन्हें 5 से 7 दिनों में काटा जा सकता है। ऐसे में न तो आप ज्यादा भार उठा सकते हैं और न ही ज्यादा कठिन व्यायाम कर सकते हैं। ऐसा तब तक नहीं करना है जब तक कि आपका डॉक्टर आपको इसके लिए अनुमति नहीं दे देता।

यदि आप दूध पिलाने वाली माँ हैं और आपने एंजियोग्राम करवाया है तो आप 2-3 दिनों तक बच्चे को दूध नहीं पिला सकती। बच्चे को दूध पिलाने के बजाय इसे पम्प के द्वारा वक्ष स्थल से निकाल दें।

जब आपको टेस्ट के दौरान संवेदनहीन करने के लिए दवाइयों का शॉट दिया जाएगा तो यह तेज चुभन जैसा लगेगा। इसके बाद जहाँ से कैथेटर को अंदर प्रवेश कराया जाएगा।

इसके बाद कैथेटर का नसों से हृदय तक पहुंचना दबाव महसूस कराएगा। लेकिन इस से आम तौर पर दर्द नहीं होता। वहीं जब कैथेटर को हृदय तक पहुंचाया जाता है और वह हृदय को छूता है तो कुछ देर के लिए धड़कन रुक सकती है।

वहीं जब डाई को शरीर के अंदर प्रवेश कराया जाता है, तो यह कुछ गर्म और झुनझुनाहट पैदा कर सकता है। हो सकता है कि मुंह में धातु जैसा टेस्ट भी आ जाए। ऐसे में जहाँ कुछ लोगों में पेट की बीमारी जैसा महसूस होता है वहीं कुछ को सिर में दर्द होता है। आपको मिचली या चंचल सा भी महसूस हो सकता है। इसके अलावा सीने में दर्द, अनियमित धड़कन, या खांसी और खुजली जैसी समस्या भी हो सकती है। यह सब कुछ इस कंट्रास्ट मटीरियल की वजह से होता है। यदि आपको इनमें से कुछ भी महसूस होता है तो आप इसके बारे में अपने डॉक्टर को जरूर बताएं ।

कैथेटर लैब का तापमान काफी ठंडा रखा जाता है। यह टेस्ट के लिए प्रयोग किये जा रहे उपकरणों को गर्म नहीं होने देता। ज्यादातर लोगों में इस टेस्ट की सबसे कठिन स्थिति कई घंटों तक एक ही स्थिति में लेटे रहना होता है। वह भी एक टेबल पर। ऐसे में आप कठोरता या ऐंठन भी महसूस कर सकते हैं।

घर जाने के बाद
छाती के जिस हिस्से से कैथेटर को प्रवेश कराया गया है उस जगह रोगी को खरोच जैसा दर्द हो सकता है। यह अनिश्चित होता है और कुछ समय के बाद खुद ब खुद ठीक हो जाता है। सर्जरी की जगह पर नाजुकता महसूस होना आम बात होती है।

  • यदि निम्न में से कोई भी स्थिति हो तो तुरंत डॉक्टर को कॉल करें:
  • यदि आपके हाथ या पैर पीले या ठन्डे पड़ जाएं, दर्द महसूस हो या सुन्न हो जाएं।
  • कैथेटर की जगह यदि तेजी से गांठ जैसी कोई चीज और दर्द महसूस हो तो।
  • यदि कैथेटर की जगह लाली आना सूजन आना या तरल पदार्थ निकलने जैसे लक्षण हों तो।
  • यदि आपको बुखार हो तो।

कार्डिएक कैथीटेराइजेशन से होने वाली जटिलताएं इस प्रकार हैं:

  • कैथेटर की जगह पर दर्द, सूजन, और नाजुकता।
  • कैथेटर से नस में होने वाली जलन। इससे राहत के लिए गर्म सिकाई का प्रयोग किया जाता है।
  • कैथेटर की जगह से खून का बहना।
  • कैथेटर के रखे गए स्थान पर खरोंच। यह कुछ दिनों में खुद ब खुद ठीक हो जाती है।
  • टेस्ट के बाद यूरिन में दिक्कत आना।
  • हालाँकि कैथेटर में ज्यादा गंभीर समस्याएँ कम ही होती हैं, लेकिन यदि ऐसा हो तो वह जीवन के लिए घातक साबित हो सकती हैं। ऐसी
  • समस्यांए सिर्फ उन्हीं लोगों में आती है जो या तो बहुत ज्यादा बीमार हो या बहुत ज्यादा उम्रदराज।

कुछ गंभीर समस्याएं जो हो सकती हैं:

  • कोरोनरी धमनी का अचानक से बंद हो जाना।
  • धमनी की अंदरूनी परत में एक छोटा सा खरोंच।
  • विपरीत सामग्री से एलर्जी की समस्या। इसमें पित्ती, खुजली जैसी परेशानी हो सकती है, या कुछ
  • मामलों में बुखार, शॉक लगना या साँस लेने में दिक्कत होना भी हो सकता है। लेकिन इन समस्याओं को बेहद आसानी से नियंत्रित भी किया जा सकता है।
  • कुछ मामलों में किडनी के खराब होने की सम्भावना रहती है। खासकर जिन्हें डायबिटीज और किडनी की समस्या पहले से वह, उनमें
  • किडनी के पूरी तरह से खराब होने की सबसे ज्यादा संभावनाएं होती हैं।
  • हृदय घात या स्ट्रोक

यदि यह समस्या आती है तो ऐसे में दूसरी सर्जरी की जरूरत भी पड़ सकती है:

विकिरण जोखिम (रेडिएशन रिस्क)-
सर्जरी के बाद हमेशा ही विकिरण किरणों के कारण उत्तकों (Sales) और कोशिकाओं के नष्ट होने का खतरा बना रहता है। इसमें एक्सरे टेस्ट भी शामिल है। लेकिन एक्सरे की किरणों से होने वाले नुकसान के बजाय इस से होने वाले फायदे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।

नतीजा
कार्डियक कैथीटेराइजेशन एक ऐसा टेस्ट है जिसमें हृदय और कोरोनरी धमनियों की जांच-परीक्षा की जाती है। इस टेस्ट की समीक्षा कार्डियोलॉजिस्ट के द्वारा की जाती है।

कुछ नतीजे इस प्रकार हैं जो आ सकते हैं:

कोरोनरी धमनियों की अवस्था या तो सामान्य होंगी या संकुचन या रुकावट हो सकती है।
हृदय कक्षों पर दबाव, हृदय की पंपिंग एक्शन (इजैक्शन फ्रैक्शन), और रक्त वाहिकाओं का सामान्य होना। हृदय वाल्व अपने सामान्य रूप में काम कर रही हो।

कई स्थितियां जो कार्डियक कैथीटेराइजेशन के परिणामों को प्रभावित कर सकती हैं। डॉक्टर आपसे आपकी हर एक जटिलताओं और आपके स्वास्थ्य के बारे में बात करेगा।

टेस्ट को क्या-क्या चीज कर सकती हैं प्रभावित-  कुछ ऐसी चीजें  हैं जिनसे आपके टेस्ट पर प्रभाव पड़ सकता है जिसके कारण टेस्ट  के उपचार में बाधा आ सकती है।
यदि आप चिंतित हैं तो, हो सकता है कि आपका रक्त चाप (ब्लैड प्रेशर) बढ़ सकता है। हृदय की धड़कन असामान्य हो सकती है।
इसमें किडनी खराब होना या जिगर (ख़राब) होना जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
आप जाँच के दौरान निर्देशों का पालन नहीं कर सकते।

गर्भवती महिलाओं के लिए कार्डिएक कैथीटेराइजेशन का प्रयोग:

  • यह जाँच उन लोगों पर नहीं की जा सकती जिन्हें कुछ विपरीत चीजों से एलर्जी की समस्या हो। जिन्हें थोड़ा बहुत नियंत्रित हृदयघात हो। जो घातक हृदय स्पंदन से पीड़ित हों। या फिर जिन्हें गुर्दों की समस्या हो।
  • कार्डियक कैथीटेराइजेशन का प्रयोग गर्भावस्था के दौरान भी नहीं किया जा सकता। ऐसा इसलिए क्योंकि उस से निकलने वाली किरणें बढ़ते हुए भ्रूण को नुकसान पहुंचा सकती है। लेकिन यदि महिला की स्थिति बेहद घातक हो और महिला की जिंदगी बचने के लिए ये टेस्ट जरुरी हो तो भ्रूण को रेडिएशन से बचाने के लिए लीड ऐप्रन का प्रयोग किया जाता है।

 



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