एएसडी कारण होने वाली परेशानियाँ

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11th April, 2017

Dil me chhed hone se hone wali preshaniyan | दिल में छेद होने से होने वाली परेशानियाँ | Problems during hole in heart?एएसडी (आट्रीयल सेप्टल डिफेक्ट) या दिल में छेद, जिसमें रोगी के हृदय के ऊपरी कक्षों के बीच की दोनों दीवारों के बीच एक छेद होता है, इसे हृदय में छिद्र के नाम से जाना जाता है। यह एक जन्मजात समस्या होती है और ऐसे मामलों में, जिनमें यह छिद्र बेहद मामूली हो खुद ही भर जाता है। वहीँ दूसरी और यदि यह इतना बड़ा हो कि खुद न भर सके तो इसका उपचार कराना आवश्यक होता है, नहीं तो यह जानलेवा बन जाता है।

एएसडी के क्या लक्षण होते हैं, वह हम अपने पहले लेख में बता चुके हैं, अब हम इस दोष के कारण होने वाली परेशानियों का जिक्र कर रहें हैं। यदि किसी बच्चे में, यह समस्या पाई बचपन में ही पता चल जाती है और डॉक्टर इसके उपचार की सलाह देते हैं, तो डॉक्टर के संपर्क में रहना आवश्यक होता है। वहीँ दूसरी और यदि यह समस्या बचपन में जांच में पता नहीं चल पाती तो भी इसके लक्षणों की पहचान से इसका पता लगाया जा सकता है।

यदि किसी व्यक्ति को पता ही न हो कि उसे एएसडी की समस्या है और उसे लक्षण भी नजर न आये हों, तो यह समस्या समय के साथ घातक भी हो सकती है।

एएसडी की समस्या के ज्यादा समय तक शरीर में बने रहने से निम्न गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं-

  • दाएं तरफ की हृदय विफलता
  • धड़कन की अनियमितता (अतालता)
  • स्ट्रोक होने का खतरा

यह वह समस्याएं हैं, जो जान-लेवा हो सकती हैं, इनके अलावा भी कुछ समस्याएं हैं जो एएसडी के कारण हो सकती हैं लेकिन जो ज्यादातर घातक नहीं होती लेकिन उपचार न मिलने और अनदेखी जैसी स्थितियों में यह भी गंभीर हो सकती हैं।   

  • फुफ्फुसीय उच्च रक्त-चाप- यदि किसी व्यक्ति के हृदय के ऊपरी कक्षों के बीच स्थित छिद्र का आकार बड़ा होता है, तो इससे फेंफड़ों पर रक्त का दबाव बढ़ जाता है। इसके कारण फुफ्फुसीय उच्च रक्त-चाप (पल्मोनरी हाइपरटेंशन) की समस्या हो सकती है।
  • ईसेनमेन्जर सिंड्रोम- हालाँकि यह बहुत कम मामलों में होता है, लेकिन इस स्थिति में पल्मोनरी हाइपरटेंशन के कारण फेंफड़े पूरी तरह से खराब हो सकते हैं। यह समस्या बेहद धीरे-धीरे पनपती है और एएसडी से पीड़ित बेहद कम व्यक्तियों में देखने को मिलती है।

कुल मिला कर एएसडी एक घातक बिमारी होती है, और इसकी शुरुआत में ही जाँच और उपचार बहुत जरूरी होता है, क्योंकि समय के साथ-साथ यह समस्या उपचार की सीमा से बाहर होती चली जाती है। इसलिए यदि किसी व्यक्ति को हृदय से जुड़ी किसी भी प्रकार की समस्या हो रही हो तो उसे इन लक्षणों को नजरअंदाज न करते हुए जाँच जरूर करा लेनी चाहिए। समय रहते की गई जाँच बड़े खतरे को रोक सकती है।  

 



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