हृदय को ऑक्सीजन न मिले तो हो सकता है, इस्केमिया

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7th December, 2016

Ischemia kaise hota hai? | इस्केमिया कैसे होता है? | How ischemia occurs?इस्केमिया एक ऐसी बिमारी है, जिसमें हृदय की मांशपेशियों को पूरी तरह से ऑक्सीजन और रक्त नहीं मिल पाता। यह हृदय की कोरोनरी धमनी में रूकावट के कारण होता है। कोरोनरी धमनियां, वह रक्त वाहिकाएं होती हैं, जो एरोटा से निकलती हैं, और हृदय की सतह पर फैली रहती हैं, और मांशपेशियों को रक्त और ऑक्सीजन पहुँचाती हैं। सोते समय बीमार धमनियों द्वारा रक्त का प्रवाह इन मांशपेशियों में हो जाता है, लेकिन यदि व्यक्ति सक्रिय हो, कुछ काम कर रहा हो या एक्सरसाइज कर रहा हो तो इसके कारण हृदय पर दबाव पड़ने लगता है।

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यानी यह समस्या, कोरोनरी धमनी रोग के बाद पनपती है और धमनी रोग जितनी गंभीर स्थिति में पहुँचता जाता है, इस्केमिया भी उतना ही ज्यादा बढ़ता रहता है।

क्रोनिक इस्केमिया

यदि कोरोनरी धमनी इतनी ज्यादा कमजोर हो जाएं कि उनसे रक्त और ऑक्सीजन कम होती चली जाए, तो इस्केमिया भी धीरे-धीरे पुराना होता चला जाता है। इस स्थिति में, रोगी को आराम करते समय भी समस्या होने लगती है। यह यह समस्या बढ़ती ही चली जाए तो क्रोनिक बन जाती है।

इस्केमिया के लक्षण

इस्केमिया में, रोगी को छाती में दर्द, दबाव और असहजता महसूस होती है। इसे ही एंजाइना भी कहा जाता है और यह कोरोनरी आर्टरी डिजीज (CAD) का सबसे लक्षण होती है। ऐसे व्यक्ति जो कोरोनरी धमनी रोग से पीड़ित हैं, वह अक्सर सीने में  जकड़न, बेचैनी, बोझ और भारीपन की शिकायत करते देखे जाते हैं।

यह दर्द,  छाती (ब्रैस्ट बोन) या उरोस्थि के नीचे से शुरू होता है और वहां से कंधे, गर्दन और जबड़े तक पहुंच जाता है। इसमें रोगी को छाती में दर्द और दबाव के साथ-साथ कभी-कभी उल्टी, मतली, सांस लेने में परेशानी और पसीना आ जाने जैसी समस्याएं भी होती हैं।  

साइलेंट इस्केमिया

हालाँकि जैसे ऊपर बताया गया है, रोगी को ऐसे लक्षण नज़र आते हैं, लेकिन कभी-कभी यह शरीर में दबे पाँव जड़े भी जमाता है। इसे साइलेंट इस्केमिया कहा जाता है, उसमें ना दर्द होता है और ना ही अन्य कोई असहजता। यहाँ तक कि डॉक्टर भी शुरुआती जांच के द्वारा इसे पहचान नहीं पाते। इस तरह की समस्या ज्यादातर उम्रदराज व्यक्तियों, मधुमेह के मरीज़ों और महिलाओं में देखने को मिलती है।

इस समस्या की जानकारी, इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (EKG) या स्ट्रेस टेस्ट के द्वारा सामने आती है। इसमें रोगी को एक्सरसाइज कराते हुए हृदय की जाँच की जाती है।



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