हृदय विफलता के असामान्य लक्षण

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22nd May, 2017

वैसे तो हृदय विफलता (Heart Failure) के रोगियों में सभी में एक जैसे ही लक्षण नजर आते हैं। लेकिन कुछ लक्षण ऐसे भी होते हैं जो इतने आम नहीं होते, और केवल कुछ ही व्यक्तियों में नजर आते हैं। ये लक्षण इतने कम और जटिल इसलिए होते हैं क्योंकि यह ज्यादातर उन्हीं लोगों में देखने को मिलते हैं जिनकी हृदय विफलता बेहद घातक स्थिति में पहुंच चुकी हो, और जिनके शरीर में इस क्षति को सहन करने की क्षमता खत्म हो चुकी हो।

नीचे दी गई पहली तालिका में कंजेस्टिव (तरल पदार्थ जमा होना) लक्षणों की जानकारी दी गई है, यह लक्षण फेंफड़ों और शरीर में लीक हुए तरल पदार्थ के कारण सामने आते हैं। वहीं दूसरी तालिका में जो लक्षण दिए गएँ हैं वह हृदय के ठीक से पम्प न कर पाने यानी रक्त संचार में खराबी के कारण होते हैं।

वहीं इन तालिकाओं के बाद इन लक्षणों के बारे विस्तार में जानकारी भी दी गई है।

यदि आपको इनमें से कोई भी लक्षण नजर आए तो आपको तुरंत अपने डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिए।

तरल पदार्थ जमाव के लक्षण 

 लक्षण  परिणाम कारण?
खांसी
  • ज्यादातर मामलों में सूखी खांसी (बिना बलगम ) के।
  • बलगम वाली खांसी हृदय विफलता को और घातक बना देती है और इसके कारण गुलाबी झागदार तरल भी आने लगता है।
  • कुछ लोगों को घरघराहट की आवाज भी आती है। यह काफी कुछ अस्थमा के जैसी होती है।
रक्त का वापिस लौट जाना और फेंफड़ों में तरल इकठ्ठा होना।
पेट की सूजन पेट का फूल जाना शरीर के इन अंगों में तरल जमा होने से होता है:

  • लिवर, जिस से पेट में सूजन और और नाजुकता जैसी स्थिति पैदा हो जाती है।
  • पेट, इसके कारण भूख कम हो जाना, उल्टी और मितली जैसे लक्षण सामने आते हैं।
  • आँतों में, इसके कारण भूख कम हो जाती है और दवाइयाँ और खाद्य-पदार्थ अच्छे से पच नहीं पाते।

उदर गुहा जलोदर (Abdominal Cavity Ascites), कोमलता  और बुखार का होना इन बातों की तरफ इशारा करता है कि इस बने हुए तरल में संक्रमण भी हो चुका है। .

जठरांत्र (Gastrointestinal) प्रणाली या उदर ( Cavity) गुहा में तरल इकठ्ठा हो जाना।

 

ख़राब रक्त संचार के लक्षण

लक्षण परिणाम शरीर के विभिन्न अंगों में रक्त का कम बहाव
 यूरिन कम आना।
  • इस अवस्था में दिन के समय में सामान्य दिनों के मुकाबले यूरिन आना कम हो जाता है। ऐसा किडनियों में रक्त के कम संचार की वजह से होता है।
  • रात में हो सकता है कि आपको यूरिन सामान्य दिनों की अपेक्षा ज्यादा आए। क्योंकि जब आप लेट जाते हैं तो तरल का बहाव पैरों में दोबारा हो जाए।
गुर्दे
पैरों, टांगों, बाँहों में ठण्ड लगना।
  • ख़राब रक्त संचरण के कारण ठण्ड महसूस होना।
बांह, टाँगे, हाथ, और पैर
चक्कर आना
  • चक्कर, घबराहट या हलका भटकाव
मस्तिष्क
मानसिक भ्रम की स्थिति
  • स्पष्ट तौर पर सोचने में अक्षम होना।
  • याददाश्त में समस्या यहाँ तक कि भाषा भी न पहचान पाना।
मस्तिष्क
बेहोशी या गुजर जाना।
  • अचानक होश खो देना (अँधेरा छा जाना)
मस्तिष्क
नपुंसकता
  • निर्माण प्राप्त करने में असमर्थता
पुरुष गुप्तांग

 

हृदय विफलता के कारण हाथों, पैरों और टांगों में ठण्ड क्यों महसूस होती है? 

जिन लोगों में हृदय विफलता होती है उन्हें कभी भी ऐसा लग सकता है कि उन्हें हाथ, पैर और टाँगे ठंडे हो रहें हैं। ऐसा इस कारण से होता है क्योंकि जब हृदय ठीक तरह से रक्त पम्प नहीं कर पाता तो यह रक्त संचार मस्तिष्क और शरीर के दूसरे अंगों की तरफ हो जाता है। इसका नतीजा यह होता है कि हाथों और पैरों को कम रक्त पहुंच पाता है, और जब इन अंगों में रक्त नहीं पहुंच पाता तो यह अंग ठंडे पड़ जाते हैं।

यह लक्षण आम तौर पर उन्हीं लोगों में नजर आते हैं जिनकी हृदय विफलता बेहद घातक अवस्था में पहुंच चुकी होती है। यदि आपके हाथ और पैर अचानक से ठन्डे और चिपचिपे हो जाते हैं, और इसके अलावा यदि हृदय विफलता के कुछ और अन्य लक्षण जैसे तरल पदार्थों का बनना (edema), मानसिक दुविधा, या यूरिन में कमी जैसे लक्षण और भी घातक हो जाते हैं तो आप मानसिक आघात की स्थिति में भी पहुंच सकते हैं। यह आघात की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब हृदय द्वारा पम्प किये जा रहे रक्त की मात्रा बहुत कम हो जाती है। यदि आपको आघात जैसे लक्षण नजर आते हैं तो इसके लिए आपको तुरंत इमरजेंसी चिकित्सा की जरूरत हो जाती है।

क्या होता है यदि मस्तिष्क को पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं मिल पाता? 

जब शरीर हृदय विफलता के लक्षणों को सहन नहीं कर पाता तो कुछ समय के बाद मस्तिष्क को भी रक्त पहुंचना बंद हो जाता है। जब मस्तिष्क को पर्याप्त रक्त नही मिल पाता तो इसका नतीजा चक्कर आना या मासिक भ्रम की स्थिति उत्पन्न होने जैसे लक्षण पैदा हो सकते हैं।

चक्कर आना या हलके भटकाव जैसी संवेदना होना। इसके अलावा हृदय विफलता के रोगियों में चक्कर आना कुछ दवाइयों के कारण भी हो सकता है। जब हृदय विफलता के रोगियों में मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह कम हो जाता है तो ऐसे लोग सोचने की क्षमता में भी असहाय महसूस करते हैं। ख़ास कर उन्हें अपनी याददाश्त और भाषा समझने में बहुत दिक्कत आती है। घातक हृदय विफलता की यह स्थिति बेहद खतरनाक होती है इस स्थिति में मरीज डॉक्टर को अपनी हालत बता भी नहीं पाता।

घातक हृदय विफलता में यदि मानसिक दुविधा (Mental confusion) जैसे लक्षण नजर आते हैं तो इसका सीधा सा अर्थ होता है कि रक्त पर्याप्त मात्रा में मस्तिष्क में नहीं पहुंच पा रहा है। खास तौर पर यह परेशानी उन लोगों में आती है जो लोग हृदय विफलता के लिए पहले ही अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं। लेकिन यदि व्यक्ति अस्पताल में भर्ती नहीं है और उसे मानसिक भ्रम हो गया है तो उसे तुरंत डॉक्टर और अस्पताल की जरूरत पड़ेगी।

ह्रदय विफलता से पीड़ित पुरुषों में नपुंसकता के कारण? 

कुछ हृदय विफलता के रोगी इरैक्शन न हो पाने (Impotence) की समस्या से भी ग्रस्त हो सकते हैं। इस तरह की समस्या की संभावनाएं बहुत ज्यादा होती हैं। कुछ केसों में ऐसा जननांगों में रक्त के कम प्रवाह के कारण होता है। जननांगों में रक्त न पहुंच पाने का एक कारण धमनियों में पट्टिका के न बन पाना ऐथर्ओस्क्लर्ओसिस (Atherosclerosis) हो सकता है। धमनियां ही जननांगों में रक्त संचार करती हैं। हृदय विफलता से पीड़ित व्यक्तियों में धामनिया ऐथर्ओस्क्लर्ओसिस से ग्रसित हो जाती हैं और इसका नतीजा नपुंसकता के रूप में सामने आता है।

इसके अलावा नपुंसकता तनाव (Depression) या किन्हीं और मानसिक कारणों से भी हो सकता है। वहीं कुछ दवाइयाँ जो हृदय विफलता के मरीजों को दी जाती हैं वह भी इसका कारण बन सकती है।



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