दाई तरफ की हृदय विफलता

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19th August, 2015

Untitled design (45)दाहिने तरफ की हृदय विफलता (राइट साइड हार्ट फेलियर) का बेहद सीधा और साधारण सा अर्थ है हृदय के दायें हिस्से द्वारा फेफड़ों में रक्त की पम्पिंग बंद कर देना।

क्यों और कैसे होता है हृदय विफलता?
हृदय जो हमारे शरीर का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसका कार्य शरीर के विभिन्न भागों में पंपिंग द्वारा रक्त भेजना है। वहीं हृदय का दाहिना भाग जो रक्त को फेफड़ों में भेजने का कार्य करता है, यदि किसी कारण से वह ऐसा न कर पाए तो इसे दाहिना हृदय विफलता कहा जाता है। ज़्यादातर लोगों में हृदय विफलता की समस्या हृदय के बायीं ओर के हिस्से (लेफ्ट वेंट्रिकल) के सही तरह से काम न कर पाने के कारण ही होती है, लेकिन हृदय के दायें हिस्से (राइट वेंट्रिकल) का ठीक से काम न कर पाना भी इसका एक कारण हो सकता है।

दायें और बाएं वेंट्रिकल का कार्य
हृदय के दोनों हिस्से (दायां और बायां) कार्य के मामले में एक दूसरे पर निर्भर करते हैं। हृदय के ये दोनों हिस्से पूरे शरीर में रक्त पहुंचाने की प्रकिया को पूरा करते हैं। जहाँ दायां हिस्सा शरीर से लिए गए दूषित रक्त को फेंफड़ों में छिड़कता है, फेफड़ें इसे छानकर शुद्ध कर वापस बाएं हृदय में भेज देतें हैं। इसके बाद बायां हिस्सा इसे पूरे शरीर में भेजता है। ऐसे में जब बांया हिस्सा खराबी के कारण रक्त को शरीर में नहीं भेज पाता तो यह वापस फेफड़ों में लौट जाता है। जिस से यह रक्त शरीर के आस-पास के हिस्सों में इकठ्ठा हो जाता है। इस ख़राब प्रकिया का असर दाहिने हिस्से पर भी पड़ता है और अतिरिक्त दबाव के कारण वह भी अपना कार्य नहीं कर पाता जिससे दाहिने हृदय विफलता जैसी परिस्थितयां उत्पन्न हो जाती हैं।

दायें हृदय विफलता और इसके कुछ कारण

कारण  क्या होता है दायां हृदय विफलता? कैसे होता है दायां हृदय विफलता?
दांया हृदय विफलता (राइट साइड हार्ट फेलियर) हृदय का लेफ्ट वेंट्रिकल रक्त को आगे पम्प नही कर पाता इस स्थिति में हृदय के बाएं हिस्से में दबाव बन जाता है। इस दबाव का असर लेफ्ट वेंट्रिकल यानी दायें हिस्से पर भी पड़ता है इसी असामान्य प्रक्रिया के कारण दाहिना हृदय विफलता होता है। लेफ्ट वेंट्रिकल द्वारा शरीर में आगे की ओर पहुंचने वाला रक्त वापस फेफड़ों के परिकोष्ट (लेफ्ट एट्रियम) में लौट आता है और वहां से वापिस दायें वेंट्रिकल में पहुंच जाता है। इससे दायें वेंट्रिकल पर अधिक दबाव आ जाता है और वह रक्त को फेंफड़ों में नहीं फेंक पाता जिस से रक्त शरीर के बाकी हिस्सों जैसे लिवर और अन्य भागों में फैल जाता है।
फेफड़ों की पुरानी बीमारी (क्रोनिक लंग डिजीज)  वातस्फीति (Enphysema) , फुफ्फुसीय अंतःशल्यता (Pulmonary Embolisam) और उच्च रक्त चाप के दूसरे कारणों से। फेफड़ेां की धमनियों में बढ़ने वाला रक्तचाप भी दायें वेंट्रिकल के कार्यभार को बढ़ावा देता  है और इसका नतीजा इस हिस्से की असफलता के रूप में सामने आता है।
कोरोनरी धमनी बीमारी
(कोरोनरी आर्टरी  डिजीज) 
हृदय को रक्त पहुँचाने वाली धमनियों में रुकावट। सीएडी जो बाएं हृदय विफलता का कारण हो सकता है, यह भी दायें हृदय विफलता को जन्म देता है। यह बाएं वेंट्रिकल को प्रभावित किये बिना सीधे तौर पर दायें वेंट्रिकल को ब्लॉक कर रक्त प्रवाह को रोक सकता है जिससे हृदय विफलता हो सकता है।
फेफडों का संकुचन (पुलमोनिक स्टेनोसिस) फेफड़ों के वाल्व का संकुचन (सिकुड़ना) दायें वेंट्रिकल में रक्त के बहाव को कम कर देेता है। फेफड़ों की पुरानी बीमारी की ही तरह यह भी दायें वेंट्रिकल पर दबाव बढ़ा देता है।
त्रिकपर्दी वाल्व संकुचन। ( ट्राइक्यूस्पिड   स्टेनोसिस) त्रिकपर्दी वाल्व का सिकुड़ जाना। दायें अलिंद के बाहर रक्त प्रवाह बाधित होने से इसमें भी (दायें वेंट्रिकल) में सूजन आ जाती है और रक्त प्रवाह बाधित हो जाता है।
त्रिकपर्दी एक प्रकार का रोग (ट्राइक्यूस्पिड रेगुरगिटशन) त्रिकपर्दी वाल्व का सही तरह से बंद नहीं होने के कारण रक्त का दायें वेंट्रिकल से वापस दायें आलिंद में प्रवाह होना। जब दाएं वेंट्रिकल पर अधिक दबाव हो जाता है तो इसका नतीजा उसके फैलाव और विफलता के रूप में सामने आता है।
पेरिकार्डियल कसाव पेरीकार्डियम जो ह्रदय के चारो ओर स्थित एक झिल्ली जैसी थैली होती है, बार-बार सूजन से यह सख्त और मोटी हो जाती है। जिसके कारण ह्रदय पम्प करने के लिए फैल नहीं पाता। एक मोटी पेरीकार्डियम हृदय के प्रभावी रूप से पंप करने की क्षमता को बाधित कर देती है।
बाएं से दाएं शंट जन्म से ही बाएं और दायें ह्रदय के बीच असामान्य संबंध का होना। इसमें भी वाल्व संकुचन की ही तरह दायें वेंट्रिकल पर भार अधिक हो जाता है।



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