हृदय विफलता के लक्षण

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9th December, 2016

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हृदय विफलता के लक्षण | Hriday Vifalta ke Lakshan | Symptoms of Heart Failure

हमारा हृदय दो तरीकों से रक्त को पंप करता है, एक तरफ तो वह रक्त को फेफड़ों में  पंप करता है, और दूसरी तरफ शरीर के बाकी हिस्सों में। हृदय का जो हिस्सा फेफड़ों में रक्त पंप करता है, वह दांयें तरफ का हिस्सा होता है और जो हिस्सा बाकी शरीर को रक्त पंप करता है, वह बांयी और का हिस्सा होता है। यदि किन्हीं कारणों से हृदय का दांया और बांया हिस्सा कमजोर पड़ जाए और पूरी तरह रक्त को पंप न कर पाए तो इसे हृदय विफलता कहा जाता है।

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जब हृदय विफलता होती है, और हृदय पूरे रक्त को आगे शरीर में और फेंफड़ो में नहीं धकेल  पाता तो कुछ रक्त वापिस पीछे फेफड़ों में चला जाता और कुछ रक्त शरीर के विभिन्न हिस्सों, जैसे टाँगे, यकृत व शरीर के अन्य हिस्सों में इकट्ठा होने लगता है। यानी शरीर में रक्त के बहाव की प्रक्रिया में रुकावट होने लगती है और रक्त शरीर के विभिन्न हिस्सों, जहाँ-जहाँ से होकर गुजरता है, वहां रुकने लगता है। 

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अब इस तरह की स्थिति में हृदय रोगी को जो लक्षण नजर आते हैं, वह कुछ इस तरह होते हैं-

  • पूरे शरीर में रक्त नहीं पहुंच पाता इसलिए हाथ-पैर ठंडे पड़ने लगते हैं।  
  • शरीर में रक्त का बहाव कम होने से, ऑक्सीजन और पोषक तत्व भी शरीर को नही मिल पाते इसलिए कमज़ोरी और थकावट महसूस होने लगती है।
  • कोई भी शारीरिक गति विधि, व्यक्ति की स्थिति को और बदतर बना देती है, क्योंकि उस स्थिति में शरीर को ज्यादा ऊर्जा की आवश्यकता होती है और उसे शरीर अचानक से बना नहीं पाता। ऐसे में व्यक्ति के हृदय को और तेजी से काम करने का दबाव झेलना पड़ता है, जबकि वह तो कार्य करने की सामान्य स्थिति में भी नहीं बचा है। इससे कुछ रोगियों को उल्टी में रक्त भी आ जाता है।
  • फेफड़ों और गले की रक्त वाहिकाओं में भी रक्त जमा हो जाता हैं, इससे सांस लेने में तकलीफ़ होने लगती है।
  • हृदय की धड़कन या तो तेज हो जाती है, या बहुत कम और व्यक्ति को घबराहट होनी शुरू हो जाती है।
  • जब हृदय को अपनी सामर्थ्य से अधिक कार्य करना पड़ता है, तो वह इसे झेल नहीं पाता और इससे छाती और आस-पास के हिस्सों में दर्द होने लगता है।

इस स्थिति पर यदि काबू पा लिया जाए, तो व्यक्ति धीरे-धीरे इससे बार सकता है। लेकिन यदि फिर भी व्यक्ति इन लक्षणों की अनदेखी करता रहे तो, शरीर के विभिन्न हिस्सो (फेफड़ों, यकृत) में रक्त जमा होता रहता है और एक समय पर यह जमावट इतनी ज्यादा हो जाती है, कि रोगी का हृदय रक्त को पंप ही नहीं कर पाता।

शरीर में रक्त की जमावट कुछ इस तरह से पहचानी जाती है-

  • फेफड़ों में जमा रक्त, व्यक्ति को सांस लेने में तकलीफ़ पैदा कर देता है, फिर चाहे वह आराम से बैठा हो या आराम कर रहा हो।
  • घुटनों, टांगों और पैरों में रक्त जमा होता है, तो वहां उभार (सूजन) दिखने लगती है।
  • व्यक्ति के शरीर में तरल जमा होने से व्यक्ति का वजन अचानक से बढ़ने लगता है।
  • गले और फेफड़ों में रक्त जमा होने से व्यक्ति को साँस लेने में तकलीफ़ के साथ-साथ ख़ासी भी होने लगती है।
  • व्यक्ति को फूला हुआ सा महसूस होने लगता है और बिमारों जैसा महसूस होने लगता है।
  • यदि अचानक से हृदय पर ज्यादा दबाव हो जाए तो व्यक्ति को सीने में तेज दर्द और बेहोशी भी हो सकती है।

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