हृदय में छेद होने पर नजर आने वाले लक्षण

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10th April, 2017

Dil me Chhed ke lakshan kya hain? | दिल में छेद के लक्षण क्या हैं? | What are the signs and symptoms of an hole in heart?एएसडी यानी दिल में छेद, जो गर्भ में रहने के दौरान ही बच्चे के हृदय में पनप जाता है। एएसडी में, हृदय के ऊपरी दो कक्षों के बीच की दीवार में छेद होता है। इसी छेद के कारण रक्त एक चैम्बर से दूसरे में अनावश्यक रूप से लीक होने लगता है, और इसके कारण हृदय के कार्य करने की प्रक्रिया पर असर पड़ता है। आम तौर पर, जन्म से पहले ही अल्ट्रासाउंड के द्वारा जाँच में आजाने वाला यह छेद जन्म के तुरंत बाद ही बच्चे की शारीरिक जाँच के दौरान, पता चल जाता है; लेकिन कई बार छेद इतना छोटा होता है कि उसका पता नहीं चल पाता।

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यदि बच्चे के हृदय में छेद हो, तो इसकी जानकारी स्टेथोस्कोप के द्वारा भी लग जाती है, क्योंकि इससे हृदय से धड़कन के अलावा, भी एक एक फुसफुसाहट की आवाज़ सुनाई देती है। यह आवाज हृदय में रक्त के लीक होने के कारण होती है। साथ ही, बच्चे में बाहरी तौर पर भी कुछ लक्षण नजर आते हैं, जैसे उसका अन्य बच्चों के मुकाबले, जल्दी तक जाना, दूध पीने और साँस लेने में परेशानी होना, बच्चे के होंठों और नाखूनों के पोरों का रंग नीला पड़ जाना, खास तौर पर, खेलते, चलते या दौड़ते समय।

छेद छोटा हो तो बच्चे के बड़ा होते-होते खुद ही भर जाता है। वहीं यदि छेद बड़ा हो तो यह खुद नहीं भरता और बड़े होने तक भी ज्यों-का-त्यों बना रहता है। इस तरह की समस्या के लक्षण आम तौर पर, नज़र आते।

यदि एएसडी की समस्या बड़ी हो तो 20 वर्ष की उम्र तक इसके लक्षण नजर आ सकते हैं। हालाँकि यह भी आवश्यक नहीं है कि ऐसा हो। कुछ मामलों में, 30 की उम्र तक भी इसके लक्षण नजर नही आते।

वहीं यदि इसके लक्षण नजर आते हैं, तो वह कुछ इस तरह से हो सकते हैं-

  • थकान और कमजोरी रहना,
  • हृदय में धड़कन रुकने जैसा महसूस होना या असहज महसूस होना, यानी अतालता की समस्या,
  • सांस लेने में परेशानी होना और यह परेशानी व्यायाम करते समय और बढ़ जाना,
  • कुछ भी गतिविधि करते समय होंठों और नाखूनों का नीला हो जाना,
  • फेंफड़ों में बार-बार संक्रमण होना
  • ठंड ज्यादा लगना और हाथ-पैर ठन्डे हो जाना,
  • टांगों, पैरों और पेट पर सूजन हो जाना
  • स्ट्रोक की समस्या,
  • स्टेथोस्कॉप के द्वारा, हृदय से फुसफुसाहट या अन्य कोई ध्वनि सुनाई देना,
  • सीने में दर्द की शिकायत रहना।

इनके अलावा, यदि किसी रोगी में निम्न लक्षण नजर आ रहे हों तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क किया जान बेहद आवश्यक होता है-

  • यदि रोगी को सांस लेने में तकलीफ़ हो रही हो,
  • यदि रोगी को बिना किसी वजह या कोई भी कार्य को करने में बहुत ज्यादा थकावट हो रही हो,
  • यदि रोगी की टांगों, पैरो और पेट पर सूजन आ गई हो,
  • अतालता, यानी हृदय की धड़कने अनियमित प्रतीत हो रही हों।

इन सभी लक्षणों के नजर आने पर रोगी को तुरंत उपचार की आवश्यकता होती है, नहीं तो यह जान-लेवा भी हो सकती है।

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