हृदय की बनावट: ठीक आपकी मुट्ठी के जितना होता है आपका हृदय

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26th October, 2015

Hriday ke char valves kaun-kaun se hein? | हृदय के चार वाल्व कौन-कौन से हैं?| What are the four Valves of Heart?हमारा हृदय हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग होता है और सबसे जटिल भी। यह सिर्फ हमारे शरीर के बाकी अंगों के मुकाबले सबसे कठिन कार्य ही नहीं करता, बल्कि हमें जीवित रखने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाता है। हमारे शरीर के बाकी अंग, जैसे यकृत, गुर्दे उनके पास काम समय-समय पर आता है और जब तक उनके पास अगला कार्य नहीं आता वह, आराम कर सकते हैं। लेकिन हमारा हृदय, दिन के 24 घंटे और साल के 365 दिन चलता ही रहता है। यदि यह रुक जाए तो आप भी जानते हैं कि क्या होगा। मांशपेशियों से बने इस जटिल अंग को थोड़ा सा आराम तब मिलता है, जब हम सोते हैं या आराम करते हैं। उस वक्त इसे थोड़ा कम रक्त फेंकना पड़ता है। लेकिन इसे रुकने की आज़ादी तब भी नहीं है। हमारे हृदय के कार्यो को ही हृदय प्रणाली (कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम) कहा जाता है।

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हमें यह तो पता है कि हमारा हृदय, हमारे सीने में बांयी और होता है, लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि हमारे हृदय का सही आकार क्या होता है? जाहिर है कि हर किसी के हृदय का आकार अलग-अलग होता है। दरअसल हर एक इंसान का हृदय ठीक उसकी अपनी मुट्ठी के बराबर होता है। चलिए जानते हैं हमारा हृदय कैसे काम करता है और इसकी बनावट कैसी होती है।

चार भागों में बँटा होता हमारा हृदय-

  • दायां अलिंद (राइट आट्रियम)- यह रक्त वाहिकाओं से रक्त लेकर, दाएँ निलय (राइट वेंट्रिकल) में धकेल देता है।
  • दायाँ निलय (राइट वेंट्रिकल)-  जब राइट आट्रियम में रक्त पहुँचता है, तो यह उसे फेफड़ों की तरफ धकेल देता है। फेफडों में साँस द्वारा ली गई ऑक्सीजन से मिल जाता है। फेफड़े ऑक्सीजन युक्त रक्त को लेफ्ट आट्रियम में धकेल देते हैं। 
  • बायाँ आलिंद (लेफ्ट आट्रियम)- लेफ्ट आट्रियम, फेफड़ों से मिले रक्त को लेफ्ट वेंट्रिकल में धकेल देता है।
  • बाँया निलय (लेफ्ट वेंट्रिकल)-  लेफ्ट वेंट्रिकल रक्त को धमनियों में तेजी के साथ धकेल देता है और यहीं से वह पूरे अंगों तक पहुँचता है। लेफ्ट वेंट्रिकल हृदय के सभी चैम्बरों में सबसे मजबूत होता है, और इसे हृदय को पूरे शरीर तक भेजने के लिए बहुत जोर लगाना पड़ता है।

हृदय जो तांत्रिका उत्तकों का बना होता है, उसे खुद भी रक्त की आवश्यकता होती है। हृदय के तांत्रिका उत्तकों तक यह रक्त उन धमनियों के माध्यम से पहुँचता है, जो हृदय की सतह से सटी होती हैं। हृदय की यही तंत्रिकाएं, हृदय को संकुचित होने और विश्राम में आने के संकेत (सिग्नल) भेजती हैं। हृदय के चारों तरफ एक थैली भी होती है, जिसे पेरीकार्डियम कहा जाता है।

पेरीकार्डियम- पेरीकार्डियम, उत्तकों की दो मोटी परतों की बनी होती है। यह हृदय के चारों तरफ मौजूद होती है और हृदय को अपने स्थान पर बनाये रखने और उसके सही तरीके से कार्य करने में मदद करती है। थैली की दोनों परतों के बीच तरल भी भरा होता है और यही तरल दोनों को आपस में रगड़ने नहीं देता और थैलियों को सुरक्षित रखता है।

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