पुरुषों में भी होता है मेनोपॉज़

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4th April, 2016

Purush Rajonivrti ka Avalokan | पुरुष रजोनिवृत्ति का अवलोकन | Overview of Male Menopauseउम्र के साथ आने वाले हार्मोन संबंधी बदलावों को केवल महिलाओं से ही जोड़कर देखा जाता है और सुनने में यह भले ही थोड़ा सा अटपटा लगे लेकिन यह प्रकिया पुरुषों में भी होती है। पुरुषों में भी महिलाओं की तरह मेनोपॉज़ होता है, लेकिन इसके लक्षण मिलते-जुलते नहीं होते। पुरुषों में, महिलाओं की तरह, हर महीने होने वाली मासिक धर्म की प्रक्रिया नहीं होती। लेकिन जैसे-जैसे उनकी उम्र बढती है, पुरुष हॉर्मोन टेस्टोस्टेरोन का पर्याप्त उत्पादन नहीं होता और धीरे-धीरे हार्मोन का स्तर कम होने लगता है। इस कारण उनमें मानसिक और शारीरिक बदलाव आता है। टेस्टोस्टेरोन, पुरुष प्रजनन ऊतकों (जैसे- वृषण और प्रोस्टेट) के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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40 साल की उम्र के बाद, पुरुषों में एंड्रोपॉज या मेंस मेनोपॉज़ की शुरुआत हो जाती है। इस स्थिति में पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन में हर साल 2 से 3 % की कमी आती है। ऐसा अक्सर उम्र बढ़ने के कारण होता है, लेकिन डायबिटीज से पीड़ित पुरुषों में भी ऐसा देखने को मिलता है। डॉक्टर का यह मानना है कि टेस्टोस्टेरोन का हॉर्मोन थेरेपी करने से, पुरुषों में दिखने वाले इन लक्षणों से राहत मिलती है।

टेस्टोस्टेरोन के स्तर में कमी होने से पुरुषों में निम्नलिखित लक्षण नज़र आ सकते हैं-

  • बहुत ज्यादा थकावट होना।
  • कमजोरी होना।
  • अवसाद या डिप्रेशन।
  • यौन समस्यायें।
  • तेजी से वजन बढ़ना।

अभी भी यह विवादास्पद है कि इन लक्षणों का टेस्टोस्टेरोन के गिरते स्तर के साथ कोई सम्बन्ध है या नहीं।

महिलाओं की तरह, पुरुषों में एकदम से हॉर्मोन का बनना बंद नहीं होता, बल्कि टेस्टोस्टेरोन के स्तर में धीरे-धीरे कमी आती है। पुरुषों में पाये जाने वाला वृषण (ऐसा अंग जो शुक्राणु का उत्पादन करता है), टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन का उत्पादन करता रहता है। एक स्वस्थ पुरुष 80 साल के बाद भी, शुक्राणु का निर्माण कर सकता है। हालांकि यदि किसी पुरुष को कोई बीमारी हो जाये तो इससे वृषण के कार्यक्षमता पर असर पड़ता है, चाहे उस समय उसकी कुछ भी क्यों न हो।



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