माइग्रेन को ट्रिगर करने वाले कारक

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1st December, 2016

Migrane kaise badhta hai? | माइग्रेन कैसे बढ़ता है? | how migraine is formed?माइग्रेन, सिर के एक तरफ आगे से पीछे की और होने वाला सिर दर्द है और यह बेहद तेज धड़कन के रूप में होता है। यह अन्य प्रकार के सिर दर्द से अलग होता है। माइग्रेन की शुरुआत ज्यादातर मानसिक तनाव, बहुत ज्यादा रोना, बहुत ज्यादा शराब का सेवन करने, शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलावों और कुछ ऐसे ही अन्य कारणों से होती है।

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एक बार यदि किसी व्यक्ति को माइग्रेन की परेशानी की शुरुआत हो जाए तो यह व्यक्ति को बहुत परेशान करती है और माइग्रेन को बढ़ावा देने वाले कारकों के संपर्क में आते ही यह दर्द व्यक्ति पर आक्रमण कर देता है। कैफीन की महक, ज्यादा शोर, शराब का सेवन, तेज रौशनी माइग्रेन को ट्रिगर कर सकते हैं।

माइग्रेन को बढ़ावा देने वाले कारक-

  • किसी व्यक्ति को किसी चीज़ की सुगंध या महक से माइग्रेन की शुरुआत हो सकती है।
  • महिलाओं में माइग्रेन के दर्द की शुरुआत का कारण, गर्भावस्था, मासिक धर्म या ओवुलेशन भी हो सकता है।
  • अत्यधिक मानसिक दबाव के कारण भी यह समस्या उत्पन्न हो सकती है,
  • उठने और सोने के कार्यक्रम में बदलाव
  • कुछ व्यक्तयों को बहुत ज्यादा तेज और चमकदार रौशनी से माइग्रेन शुरु हो सकता है।
  • कुछ को तनाव और थकान के कारण भी माइग्रेन की शुरुआत हो सकती है।
  • उचित नींद न लेने या बहुत ज्यादा सोने पर भी यह समस्या ट्रिगर हो सकती है।
  • कुछ दवाइयां जैसे; गर्भ निरोधक गोलियां भी इसका कारण हो सकती हैं,
  • मौसम में बदलाव के कारण भी यह दर्द शुरू हो सकता है।
  • बहुत ज्यादा ठंडक या गर्मी भी इस सिर दर्द को ट्रिगर कर सकती है।
  • किसी व्यक्ति को कॉफी की सुगंध से भी माइग्रेन की समस्या हो सकती है। खास तौर पर यदि वह महिला है और गर्भवती भी है।
  • यदि माइग्रेन की शुरूआत हो रही हो तो इस दौरान, यात्रा करना भी इस दर्द को गंभीर दर्द में बदल सकता है।
  • कभी-कभी अंतरंग संबंध भी माइग्रेन की स्थिति को और गंभीर बना सकते हैं।
  • यदि सिर में दर्द महसूस हो रहा हो तो, उछलना कूदना, खेलना या एक्सरसाइज करना भी माइग्रेन के दर्द को और बढ़ा देते हैं।

यदि माइग्रेन के कारण खत्म हो जाएं तो यह समस्या खुद-ब-खुद ही ठीक हो जाती है। इसके लिए किसी प्रकार के इलाज की जरुरत नहीं होती। लेकिन यदि ऐसा न हो, तो यह समस्या बढ़ती चली जाती है और व्यक्ति मेडिकल ट्रीटमेंट पर निर्भर हो जाता है।



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