सोलिटरी पल्मोनरी नोड्यूल सर्जरी- क्या हो अगला कदम?

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21st January, 2016

Solitary Pulmonary Nodule ka Upchar Kaise Kiya jata hai? | सोलिटरी पल्मोनरी नोड्यूल का उपचार कैसे किया जाता है? | How to treat Solitary Pulmonary Nodule (SPN)?सोलिटरी पल्मोनरी नोड्यूल (SPN), की सर्जरी के बाद, जब आपको अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है, और आप घर चले जाते हैं, तो इसके बाद आपको कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना होता है। क्योंकि यह समय आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। आप अपनी देखभाल किस तरह, और कितनी सावधानी से करते हैं, आपका ठीक होना इसी बात पर निर्भर करता है।

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यहाँ हम इसी बात की जानकारी देने जा रहें हैं कि सोलिटरी पल्मोनरी नोड्यूल के लिए कराई गई सर्जरी के बाद आपको घर पर अपना ख्याल कैसे रखना है। इसके अलावा यह जानकारियां उनके लिए भी जरुरी है, जिन्हें यह समस्या है, लेकिन बिना सर्जरी के वह अन्य उपचार ले रहे हैं।

फॉलोअप-

बिनाइन SPN करा चुके लोगों के लिए, यह बेहद जरुरी होता है कि वह नियमित तौर पर डॉक्टर के पास चेक अप के लिए जाएं।

  • ऐसे लोग जिनको बिनाइन SPN की समस्या है, उन्हें पहले साल में हर 3 से 4 महीनें में एक बार छाती का एक्स-रे या CT स्कैन जरूर कराना चाहिए। दूसरे साल में हर छः महीनें पर और कम से कम पांच साल तक, साल में एक बार छाती का एक्स-रे या CT स्कैन जरूर करा लेना चाहिए।
  • ऐसे लोग जिनमें नोड्युल एक सेंटीमीटर से कम लम्बाई का है और यदि वह धूम्रपान नहीं करते है तो ऐसे लोगो में कैंसर का खतरा भी कम होता है। इसलिए डॉक्टर ऐसे लोगों में फॉलोअप टाइम मतलब जाँच का समय बढ़ा सकते है।

SPN की रोकथाम

SPN से बचने का सबसे अच्छा तरीका है, इसके होने के कारणों से बचें। यहाँ हम आपको कुछ ऐसे ही कारकों की जानकारी देने जा रहें हैं, जोकि SPN को जन्म दे सकते हैं। इस जानकारी से आप SPN  होने के खतरे को कम कर सकते हैं।

धूम्रपान- यदि आप धूम्रपान करते हैं, तो इसके कारण आपमें SPN के घातक होने की सम्भावना बढ़ जाती है।
यदि आप ऐसे जगह पर यात्रा करते हैं, जहाँ बहुत से कवक जैसे – हिस्टोप्लास्मोसिस, क्यॉकिडिओइडोमयकोसिस, ब्लास्टोमयकोसिस के कारण संक्रमण हो सकता है और यदि आप ट्यूबरकुलोसिस होने के उच्च जोखिम पर हैं, तो इससे आपमें SPN का खतरा बढ़ जाता है।
फेफड़ों के कैंसर के लिए, आप जो काम करते है, उससे जुड़े जोखिम कारक आपको प्रभावित करते हैं। जैसे, यदि आप अभ्रक, रेडॉन, निकल, क्रोमियम, विनाइल क्लोराइड, और पॉलीसाइक्लिक हाइड्रोकार्बन रसायनों के संपर्क में आते हैं, तो इनसे भी आपमें SPN के घातक होने की सम्भावना बढ़ जाती है।

इन्हें भी जानें –

अधिकांश SPN बिनाइन होते हैं, और यह फेफड़े के कैंसर की प्रारंभिक अवस्था को प्रदर्शित करते हैं।

जिन लोगों में, फेफडे का कैंसर फैला नहीं है, तो जाँच के बाद उनमें जीवित रहने की दर 30-50% तक होती है। वहीं यदि यह उन्नत स्तर पर पहुंच गया है, तो पांच साल तक जीवित रहने की दर केवल 5% ही रह जाती है।

फेफड़े के कैंसर के प्रारंभिक चरण, जोकि SPN जैसा ही दिखता है, यदि शीघ्र ही इसका निदान और उपचार किया जाये तो कैंसर से बचा जा सकता है।



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