कई प्रकार का होता है दमा

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28th October, 2015

Asthma kitne Prakar ka hota hai? | अस्थमा कितने प्रकार का होता है? | What are the types of Asthma?दमा, जिसे सिर्फ एक ही नाम से जाना जाता है, अलग-अलग लक्षणों के आधार पर अलग-अलग प्रकार का होता है।

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हमारे आयुर्वेद में आयुर्वेद में इसे 5 पांच प्रकार का बताया गया है।

दमा के 5 प्रकार जैसे:-

1.  एलर्जिक अस्थमा (क्षुद्र श्वांस)
2. तमक श्वास
3.  साँस
4.  ऊध्र्वश्वास
5. छिन्न श्वास

दमा के पांच प्रकार और उनके लक्षण

एलर्जिक अस्थमा (क्षुद्र श्वांस)
यह रोग आम तौर पर, रूखे पदार्थों के सेवन, या क्षमता से अधिक कार्य करने से हो जाता। हालाँकि यह रोग ज्यादातर इतना तेज नहीं होता और अपने आप ठीक भी हो सकता है।

इसमें आम तौर पर, साँस में तकलीफ जैसी समस्या सामने आती है।

तमस श्वांस (पीनस)
एलर्जिक अस्थमा के मुकाबले दमे का यह प्रकार थोड़ा जटिल होता है। आम तौर पर बारिश में भीगने पर होने वाले इस दमे में, गला जकड़ जाता है, और इसका नतीजा यह होता है कि गले में जमा कफ ऊपर की और उठ जाता है और इस से साँस लेने में दिक्कत आने लगती है। इस प्रकार के रोग की सबसे महत्वपूर्ण पहचान सांस के आने-जाने में तकलीफ के साथ-साथ गले में घड़घड़ाहट की आवाज आना होता है।

तमस श्वांस के कुछ अन्य लक्षण
इस प्रकार का दमा बहुत तकलीफदेह होता है। बोलने में परेशानी,  नींद न आना (अनिद्रा) भय और भ्रम की स्थिति, मुँह सूखा रहना, लेटते ही बैचनी शुरू हो जाना और सिरदर्द होना इसके लक्षण हैं।

ऊध्र्वश्वास (सांस को जोर से ऊपर की ओर खिंचना)
जोर से सांस लेना, छोड़ते समय परेशानी होना। घबराहट, सांस की नली में बलगम इकट्ठा हो जाना। बेहोशी जैसा महसूस होना।

महाश्वांस
सांस का ऊपर की ओर अटका सा महसूस होना, तेजी से साँस लेना, खांसने में अधिक कष्ट होना, याददाश्त का कम होना, मुंह व आंखों का खुला रहना, मल-मूत्र की रुकावट, बोलने में कठिनाई तथा सांस लेने व छोड़ते समय गले से घड़घड़ाहट की आवाज आना।  जोर-जोर से सांस लेना, आंखों का फट सा जाना और जीभ का तुतलाना।

छिन्न श्वांस
इस रोग में रोगी को सामान्य साँस नहीं आती। सांस पेट फूला रहता है और पेडू में जलन होती है। पसीना बहुत अधिक आता है। आंखों से पानी गिरता है और मुंह व आंखे लाल हो जाती हैं, चेहरा सूख जाता है, मन उत्तेजित रहता है और बोलने में परेशानी होती है। रोगी की मूत्राशय में बहुत जलन होती है और रोगी हांफता हुआ बड़बड़ाता रहता है।



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