रजोनिवृत्ति की समस्याओं के लिए घरेलू उपचार

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24th May, 2017

Rajonivrti ke liye Prakrtik Upachar | रजोनिवृत्ति के लिए प्राकृतिक उपचार | Natural Remedies for Menopauseरजोनिवृत्ति का अर्थ है माहवारी का स्थाई रूप से बंद हो जाना। लगभग 40 वर्ष की उम्र पार करते-करते अधिकतर महिलाओं के गर्भाशय और अण्डकोष में होने वाली गतिविधियाँ समाप्त हो जाती है। ऐसा इसलिए होता है क्योकि गर्भाशय में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रान नामक हार्मोन का निर्माण होना बंद हो जाता है। इस दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के लक्षण देखे जाते हैं. जैसे- बहुत ज्यादा गर्मी लगना, सेक्स इक्छा में कमी, थकावट यादाश्त का कम होना, इत्यादि।

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 मेनपॉज की शुरुआत में कुछ इस तरह के लक्षण नज़र आते हैं-
  • अनियमित रक्तस्राव का होना
  • जरूरत से ज्यादा गर्मी लगना
  • बार-बार यूरिन पास करना
  • अचानक से वजन का बढ़ना
  • मूड में परिवर्त्तन जैसे कि बात-बात पर गुस्सा आना
  • बहुत अधिक थकावट होना
  • रात में पसीना आना
  • स्तनों के आकार में बदलाव
  • योनि का सूखापन
  • सेक्स की इक्षा में कमी

इन लक्षणों से राहत पाने के लिए घरेलू उपचार

ब्लैक कोहोश

ब्लैक कोहोश, बटरकप की एक प्रजाति का एक पौधा है। रजोनिवृत्ति के दौरान कई महिलाओं को बहुत ज्यादा गर्मी लगने की शिकायत होती है। ब्लैक कोहोश एक ऐसा हर्ब है जो महिलाओं को ज्यादा गर्मी लगने और रात में पसीना होने जैसे लक्षणों से राहत देने में काफी कारगर है। इसे हेपेटाइटिस और हाई ब्लड प्रेशर के लीलाज में भी इस्तेमाल किया जाता है।

सोया

सोया में आइसोफ्लैवोनेस पाया जाता है, जोकि एक फाइटोएस्ट्रोजन (पौधों में पाया जाने वाला एस्ट्रोजन) है। यह हॉर्मोन एस्ट्रोजन से काफी मिलता-झूलता होता है। इसलिए इसके सेवन से मेनोपॉज़ में नज़र आने वाले लक्षणों से राहत मिलती है। डॉक्टर सोया को टोफू और सोया मिल्क के रूप में लेने की सलाह देते हैं। टेबलेट या पाउडर के रूप मे, इसके सेवन की सलाह नहीं दी जाती है।  

फाइटोएस्ट्रोजन्स 

जिन महिलाओं में मेनोपोज के लक्षण दिखाई दे रहे हों उन्हें फाइटोएस्ट्रोजन्स युक्त खाद्य-पदार्थो का सेवन करना चाहिए। खासकर- अलसी के बीज, सोयाबीन, अखरोट, साबुत अनाज जैसे- राई और जौ, इत्यादि के रूप में। क्योंकि, इन चीजों में फाइटोएस्ट्रोजन भरपूर मात्रा में होता है। इन चीजों को अपने आहार में शामिल करने से मेनोपॉज की समस्या को प्राकृतिक तरीके से रोका जा सकता है। अलसी में ओमेगा 3 फैटी एसिड पाया जाता है, जो फाइटोएस्ट्रोजन की तरह काम करता है। यह महिलाओं में मेनोपॉज़ के दौरान नज़र आने वाले लक्षणों से राहत देता है। इसी के साथ ये कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को भी कम करता है। साबूत अलसी नहीं खाना चाहिए, इसे पचाना मुश्किल होता है।

विटामिन E

विटामिन E का सेवन करने से बहुत ज्यादा गर्मी लगना जैसी समस्या से राहत मिलती है। इसके अलावा विटामिन E युक्त तेल को योनि में लगाने से वैजाइना में सूखापन जैसी समस्या में भी काफी राहत मिलती है।

योग और व्यायाम

हर एक महिला को नियमित व्यायाम करना चाहिए। व्यायाम और ध्यान से, चिड़चिड़ापन और अत्यधिक गर्मी लगाना जैसी समस्या से राहत पाया जा सकता है। योग और व्यायाम से नींद सम्बंधित समस्या से राहत पाया जा सकता है।

पानी और फलों का जूस

पानी और फलों का सेवन करने से शरीर में पानी की कमी नहीं होगी और शरीर को एंटीऑक्सीडेंट भी मिलती है। एंटीऑक्सीडेंट का सेवन करने से मेनोपॉज़ की समस्या से निपटा जा सकता है।

इन लक्षणों से राहत पाने के लिए महिलाओं को दवाइयों की जरुरत नहीं होती। इन घरेलू उपचार के साथ-साथ, चाय, कॉफी और मसालेदार आहार का सेवन कम करके, मेनोपोज़ की समस्या से निपटा जा सकता है। व्यायाम के द्वारा, आस्टिओपरोसिस की समस्या से कुछ हद तक निजात पाया जा सकता है और इन सभी के साथ-साथ सबसे अहम चीज है संतुलित और पौष्टिक आहार का सेवन करें। लेकिन यदि किसी महिला को बहुत अधिक शारीरिक और मानसिक कष्ट है तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।

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